अरावली पर्वतमाला संरक्षण पर जनता से मांगे गए सुझाव, सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर्ड कमेटी ने शुरू की प्रक्रिया

देश की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में शामिल अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और उससे जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अब आम नागरिक भी अपनी राय और सुझाव दे सकेंगे। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर्ड कमेटी ने जनता से सुझाव और तथ्यात्मक जानकारी आमंत्रित की है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य अरावली क्षेत्र से जुड़े पर्यावरणीय, पारिस्थितिक और संरक्षण संबंधी पहलुओं का व्यापक अध्ययन करना है ताकि भविष्य के लिए प्रभावी और व्यावहारिक समाधान तैयार किए जा सकें।
इस वर्ष मई में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला और उससे जुड़े विभिन्न विषयों की गहन समीक्षा के लिए एक हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया था। समिति को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह अरावली क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, पर्यावरणीय चुनौतियों, संरक्षण उपायों और इससे जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का विस्तृत अध्ययन कर अपनी समग्र रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे। समिति का उद्देश्य केवल मौजूदा परिस्थितियों का आकलन करना ही नहीं, बल्कि ऐसे सुझाव भी देना है जो आने वाले वर्षों में अरावली के संरक्षण को अधिक प्रभावी बना सकें।
अरावली पर्वतमाला पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह पर्वत श्रृंखला कई राज्यों में फैली हुई है और जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, जैव विविधता तथा जलवायु संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। पिछले कुछ वर्षों में अनियंत्रित खनन, शहरी विस्तार, अवैध निर्माण और वन क्षेत्र में कमी जैसी चुनौतियों के कारण अरावली के प्राकृतिक स्वरूप पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। इसी कारण इसके संरक्षण को लेकर लगातार चिंता व्यक्त की जाती रही है।
हाई पावर्ड कमेटी ने नागरिकों, पर्यावरण विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे अपने सुझाव, अनुभव और तथ्यात्मक जानकारी समिति तक पहुंचाएं। यदि किसी व्यक्ति के पास दस्तावेज, अध्ययन, शोध रिपोर्ट, फोटो, मानचित्र या अन्य सत्यापित सामग्री उपलब्ध है, तो उसे भी अपने सुझावों के साथ साझा किया जा सकता है। इससे समिति को जमीनी स्तर की जानकारी प्राप्त होगी और रिपोर्ट अधिक व्यापक एवं संतुलित बन सकेगी।
समिति को अपनी विस्तृत रिपोर्ट अगले महीने की 31 तारीख से पहले सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करनी है। इसलिए सुझाव भेजने के लिए सीमित समय निर्धारित किया गया है। इच्छुक लोग तीन सप्ताह के भीतर अपने सुझाव और संबंधित दस्तावेज निर्धारित ईमेल माध्यम से भेज सकते हैं। समिति का मानना है कि विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सुझाव भविष्य की संरक्षण नीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली पर्वतमाला केवल एक भौगोलिक संरचना नहीं है, बल्कि यह उत्तर-पश्चिम भारत के पर्यावरणीय संतुलन की आधारशिला है। यदि इसके संरक्षण के लिए समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर जल स्रोतों, वन्यजीवों, कृषि और स्थानीय जलवायु पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आम जनता की भागीदारी इस पूरी प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बना सकती है।
इस पहल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों की सहभागिता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों और प्रमाणों के आधार पर तैयार होने वाली रिपोर्ट भविष्य में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण, पुनर्स्थापन और सतत विकास के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।
