असम में बाढ़ का कहर तेज, 12 जिलों में 1.70 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर

असम में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई है। राज्य के कई हिस्सों में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। ताजा हालात के अनुसार राज्य के 12 जिलों में 1.70 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है, जबकि हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
सबसे अधिक असर फ्लैश फ्लड वाले क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। तेओक और काकोजन क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-715 का एक हिस्सा पानी में डूब जाने से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सड़क पर पानी भर जाने के कारण लोगों की आवाजाही बाधित हो गई है और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
जोरहाट जिले में बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। राहत दल लगातार नावों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रहे हैं। जिले में आठ नावों को अलग-अलग संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत लोगों को निकाला जा सके। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ घंटों में जलस्तर में हल्की कमी के संकेत मिले हैं, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि यदि बारिश का दौर कमजोर पड़ता है तो आने वाले दिनों में हालात में कुछ सुधार हो सकता है। हालांकि प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
राज्य सरकार ने भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों को और तेज करने के निर्देश दिए हैं। जनप्रतिनिधियों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार मौजूद रहकर हालात की निगरानी करने और जरूरतमंद लोगों तक हर संभव सहायता पहुंचाने के लिए कहा गया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, भोजन, पेयजल, दवाइयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
बाढ़ के कारण इस वर्ष अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है। हाल ही में शिवसागर जिले के अमगुरी क्षेत्र में एक व्यक्ति की डूबने से मौत हो गई, जिसके बाद इस साल बाढ़ से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ गई है। प्रशासन लोगों से नदी और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील कर रहा है।
बाढ़ का असर केवल आबादी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है। 10 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। इसके अलावा 580 से ज्यादा गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं और कई स्थानों पर लोगों को अस्थायी राहत शिविरों में रखा गया है।
लगातार हो रही बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। आपदा राहत बल और राज्य की बचाव टीमें सबसे अधिक प्रभावित जिलों में लगातार अभियान चलाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री वितरित करने में जुटी हुई हैं। मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने तथा आवश्यक होने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की अपील की है।
