जी-7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी की अहम कूटनीतिक पहल, ट्रंप से मुलाकात पर दुनिया की नजर

फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक गतिविधियां वैश्विक चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों के बीच आयोजित इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में भारत की भूमिका पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली नजर आ रही है। प्रधानमंत्री मोदी विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर भारत का पक्ष रखते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आर्थिक विकास को नई दिशा देने के प्रयासों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
सम्मेलन के दौरान आयोजित एक महत्वपूर्ण सत्र में संतुलित, समावेशी और सतत आर्थिक विकास पर चर्चा की जा रही है। इस मंच पर दुनिया के प्रमुख देशों के नेता, नीति निर्माता और आर्थिक संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे में भारत की राय और अनुभव को गंभीरता से सुना जा रहा है। बीते कुछ वर्षों में भारत ने आर्थिक विकास, डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक सहयोग के क्षेत्र में जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उन्होंने उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक मजबूत और विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित किया है।
हालांकि सम्मेलन के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के बीच सबसे अधिक चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक को लेकर है। दोनों नेताओं की यह औपचारिक मुलाकात लंबे अंतराल के बाद हो रही है, इसलिए वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक हलकों की नजर इस वार्ता पर टिकी हुई है। भारत और अमेरिका के संबंध पिछले वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं और दोनों देश रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, तकनीक तथा रणनीतिक सहयोग के क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति प्रमुख मुद्दा बन सकती है। हाल के घटनाक्रमों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया है। ऐसे में भारत और अमेरिका दोनों के लिए इस विषय पर व्यापक चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा भी वार्ता के केंद्र में रहने की संभावना है, क्योंकि तेजी से बढ़ती वैश्विक मांग और बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना सभी देशों की प्राथमिकता बन चुका है।
इसके अलावा दोनों नेताओं के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है और दोनों देश नए अवसरों की तलाश में हैं। निवेश, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। यह बैठक दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति देने वाली साबित हो सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग पर केंद्रित एक विशेष कार्यकारी बैठक में भी हिस्सा लेंगे। इस सत्र में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ दुनिया की प्रमुख एआई कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। यहां भविष्य की तकनीकों, डिजिटल नवाचार और जिम्मेदार एआई विकास पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री यूरोपीय संघ और जर्मनी के शीर्ष नेतृत्व के साथ भी अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य व्यापार, तकनीक, निवेश, हरित ऊर्जा और वैश्विक सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत बनाना है। कुल मिलाकर जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि आज दुनिया के महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है और वैश्विक समुदाय कई जटिल चुनौतियों के समाधान के लिए नई दिल्ली की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है।
