नीट पेपर लीक पर संसद में आमने-सामने एनडीए और विपक्ष, चर्चा और इस्तीफे की मांग को लेकर बढ़ा सियासी टकराव

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नीट परीक्षा पेपर लीक विवाद को लेकर संसद का माहौल एक बार फिर राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया। संसद परिसर के मकर द्वार पर गुरुवार को एनडीए और विपक्षी सांसदों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। एक ओर एनडीए के सांसदों ने सदन के भीतर पेपर लीक मामले पर व्यापक चर्चा कराने की मांग उठाई, वहीं दूसरी ओर विपक्षी सांसद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार को घेरते नजर आए। इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया कि परीक्षा प्रणाली से जुड़ा यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का भी प्रमुख विषय बन चुका है।

एनडीए नेताओं का कहना है कि सरकार इस मुद्दे पर किसी भी तरह की चर्चा से पीछे नहीं हट रही है और संसद ही इस विषय पर समाधान निकालने का सबसे उपयुक्त मंच है। भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद नितिन नवीन ने कहा कि केंद्र सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़े हर पहलू पर खुलकर चर्चा करने के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस विषय पर गंभीर बहस करने के बजाय लगातार राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है। उनके अनुसार यदि सभी दल सदन में बैठकर विचार-विमर्श करें तो परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए प्रभावी नीति तैयार की जा सकती है।

नितिन नवीन ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष सदन में इस विषय पर चर्चा से बच रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का उद्देश्य युवाओं के लिए बेहतर और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है, ताकि मेहनत करने वाले छात्रों को किसी भी प्रकार की अनियमितता का सामना न करना पड़े। उनका कहना था कि सरकार इस विषय पर हर सुझाव सुनने और आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है।

भाजपा महासचिव और सांसद तरुण चुघ ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया घोषणा का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार छात्रों के सपनों और उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा पेपर लीक मामलों में त्वरित अदालतों के गठन की घोषणा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए गंभीर है। उनके अनुसार सरकार की अब तक की सभी कार्रवाइयों से यह संदेश गया है कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून से बचने का अवसर नहीं मिलेगा।

वहीं विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार से छात्रों की मांगों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक बयानबाजी से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि छात्रों की वास्तविक चिंताओं को समझना और उन पर कार्रवाई करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान जिन लोगों पर बल प्रयोग किए जाने के आरोप लगे हैं, उनके खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए ताकि छात्रों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।

प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों के साथ सीधे संवाद शुरू करने का आग्रह भी किया। उनका कहना था कि यदि सरकार छात्रों की बात सीधे सुनेगी तो उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा। इस बीच संसद परिसर में जारी विरोध प्रदर्शनों ने यह संकेत दिया कि नीट पेपर लीक का मुद्दा केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक विमर्श, शिक्षा सुधार और युवाओं के भविष्य से जुड़ा राष्ट्रीय विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस मुद्दे पर होने वाली चर्चा और सरकार की आगे की रणनीति पर देशभर के छात्रों और अभिभावकों की नजर बनी रहेगी।

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