पीएम ई-ड्राइव योजना से इलेक्ट्रिक वाहनों को बड़ी रफ्तार, चार्जिंग स्टेशन के लिए 2,000 करोड़ रुपए का प्रावधान

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा देने और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के तहत पूरे देश में इलेक्ट्रिक वाहन सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए 2,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को आसान बनाना, चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करना और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देना है। यह योजना पूरे भारत में लागू है और इसके तहत किसी भी राज्य के लिए अलग-अलग बजट निर्धारित नहीं किया गया है।
इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। हालांकि कुछ राज्यों ने इस दिशा में तेजी दिखाई है, लेकिन असम ने अभी तक प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहन सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए कोई प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया है। इसी कारण राज्य में इस योजना के अंतर्गत चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। कछार जिले के लिए भी इस संबंध में कोई अलग मूल्यांकन नहीं किया गया है।
इसके बावजूद असम में इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। जुलाई 2026 तक राज्य में 42 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन बिक चुके हैं। इनमें कछार जिले की हिस्सेदारी भी उल्लेखनीय रही है। राज्य में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक वाहनों को सरकारी प्रोत्साहन का लाभ मिला है और निर्माताओं को भी प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जा चुका है। इससे साफ है कि उपभोक्ताओं के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर विश्वास बढ़ रहा है और बाजार में इनकी मांग लगातार मजबूत हो रही है।
देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं एक साथ संचालित की जा रही हैं। इनमें फेम इंडिया योजना चरण-II, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) ऑटो योजना, उन्नत रसायन सेल यानी एसीसी बैटरी निर्माण योजना, प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना और प्रधानमंत्री ई-बस सेवा-पीएसएम योजना प्रमुख हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल इलेक्ट्रिक वाहन खरीद को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि देश में बैटरी निर्माण, ऑटोमोबाइल उत्पादन, चार्जिंग नेटवर्क और सार्वजनिक परिवहन को भी आधुनिक बनाना है।
फेम इंडिया योजना के दूसरे चरण ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस योजना के माध्यम से लाखों इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहनों को प्रोत्साहन मिला। साथ ही हजारों इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती और चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई। इससे देश में इलेक्ट्रिक परिवहन का आधार पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुआ है।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के उद्देश्य से पीएलआई-ऑटो योजना लागू की गई है, जिसके जरिए उन्नत ऑटोमोटिव तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों के घरेलू निर्माण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही एसीसी बैटरी निर्माण योजना के तहत भारत में आधुनिक बैटरी उत्पादन क्षमता विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे भविष्य में आयात पर निर्भरता कम हो सके और इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत घटाने में मदद मिले।
प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के तहत आने वाले वर्षों में लाखों इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा हजारों इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती के लिए भी बड़ी राशि निर्धारित की गई है। देश के प्रमुख महानगरों में इलेक्ट्रिक बसों का नेटवर्क मजबूत करने के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा-पीएसएम योजना के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन एजेंसियों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने की व्यवस्था भी की गई है, ताकि इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
इलेक्ट्रिक वाहनों को आम लोगों के लिए अधिक किफायती बनाने के उद्देश्य से सरकार ने कई कर संबंधी राहतें भी दी हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों, चार्जरों और चार्जिंग स्टेशनों पर जीएसटी को घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। इसके अलावा बैटरी से चलने वाले वाहनों के लिए हरी नंबर प्लेट की व्यवस्था लागू की गई है और उन्हें परमिट की अनिवार्यता से छूट भी दी गई है। राज्यों को इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स माफ करने की सलाह भी दी गई है, जिससे शुरुआती खरीद लागत कम हो और अधिक से अधिक लोग स्वच्छ और आधुनिक परिवहन विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित हों। इन सभी पहलों से यह स्पष्ट होता है कि भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में देश का परिवहन तंत्र अधिक पर्यावरण अनुकूल और तकनीकी रूप से उन्नत बनने की दिशा में मजबूत कदम उठा रहा है।
