पीएम स्वनिधि योजना से बदली लाखों स्ट्रीट वेंडरों की जिंदगी, कारोबार बढ़ा, आय में 20% तक का इजाफा

देशभर के लाखों रेहड़ी-पटरी और छोटे कारोबारियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि यानी पीएम स्वनिधि योजना लगातार सकारात्मक परिणाम दे रही है। कोरोना महामारी के कठिन दौर में शुरू की गई इस योजना ने न केवल छोटे व्यापारियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई, बल्कि उन्हें औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने और उनके कारोबार को नई गति देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हाल के आंकड़े बताते हैं कि इस योजना का लाभ लेने वाले लाखों स्ट्रीट वेंडरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और उनका जीवन स्तर पहले की तुलना में बेहतर हुआ है।
पीएम स्वनिधि योजना की शुरुआत 1 जून 2020 को की गई थी। इसका उद्देश्य ऐसे स्ट्रीट वेंडरों को बिना किसी बड़ी औपचारिक प्रक्रिया के आसान ऋण उपलब्ध कराना था, जिनका रोजगार महामारी के दौरान बुरी तरह प्रभावित हुआ था। योजना के तहत समय पर ऋण चुकाने वाले लाभार्थियों को अगली किस्त में अधिक राशि का ऋण लेने का अवसर भी मिलता है। 12 जुलाई 2026 तक योजना के अंतर्गत दूसरी किस्त का लाभ लेने वाले स्ट्रीट वेंडरों की संख्या लगभग 29.71 लाख और तीसरी किस्त प्राप्त करने वालों की संख्या 8.49 लाख से अधिक पहुंच चुकी है। यह आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में लाभार्थी समय पर ऋण चुकाकर योजना का लगातार लाभ उठा रहे हैं।
इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘स्वनिधि से समृद्धि’ अभियान भी है, जिसकी शुरुआत 4 जनवरी 2021 को की गई थी। इस पहल का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि लाभार्थियों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़कर उनके जीवन स्तर में समग्र सुधार करना है। इसके तहत पात्र परिवारों को केंद्र सरकार की आठ प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है, ताकि उन्हें स्वास्थ्य, बीमा, सामाजिक सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं का लाभ मिल सके। जुलाई 2026 तक पीएम स्वनिधि के 50.63 लाख लाभार्थियों और उनके लगभग 1.06 करोड़ परिवार के सदस्यों का सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइल तैयार किया जा चुका है। साथ ही उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत कुल 1.56 करोड़ से अधिक लाभ स्वीकृत किए जा चुके हैं।
योजना के प्रभाव को समझने के लिए किए गए विभिन्न अध्ययनों में भी इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। वर्ष 2023 में देशभर के 100 शहरी स्थानीय निकायों में 5,000 से अधिक लाभार्थियों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि लगभग 95 प्रतिशत लाभार्थियों के लिए पीएम स्वनिधि के तहत मिला ऋण उनके जीवन का पहला औपचारिक बैंक ऋण था। अधिकांश लाभार्थियों ने इस धनराशि का उपयोग अपने व्यवसाय को दोबारा शुरू करने, नया सामान खरीदने और कारोबार का विस्तार करने में किया।
इसके बाद वर्ष 2025 में 99 शहरी स्थानीय निकायों में 5,000 से अधिक लाभार्थियों पर दोबारा अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में लगभग 60 प्रतिशत ऐसे लोग भी शामिल थे, जो पहले अध्ययन का हिस्सा रह चुके थे। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 से 2025 के बीच योजना का लाभ लेने वाले स्ट्रीट वेंडरों की वार्षिक कारोबारी आय में औसतन लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि आसान ऋण सुविधा ने छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि सभी ऋण चक्रों में लगभग 30 प्रतिशत लाभार्थियों ने पीएम स्वनिधि के अलावा अन्य संस्थानों से भी ऋण प्राप्त किया। इससे संकेत मिलता है कि इस योजना ने लाखों छोटे व्यापारियों की औपचारिक क्रेडिट हिस्ट्री तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है। पहले जिन लोगों की बैंकिंग प्रणाली तक पहुंच बेहद सीमित थी, अब वे वित्तीय संस्थानों का भरोसा जीतने में सफल हो रहे हैं।
इसके अलावा डिजिटल भुगतान को अपनाने में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। बड़ी संख्या में स्ट्रीट वेंडर अब क्यूआर कोड और अन्य डिजिटल माध्यमों से भुगतान स्वीकार कर रहे हैं, जिससे उनके कारोबार में पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ी हैं। योजना का प्रभाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परिवारों की आर्थिक स्थिरता, बेहतर भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और बच्चों की शिक्षा पर भी सकारात्मक असर पड़ा है। यही कारण है कि पीएम स्वनिधि योजना आज देश के छोटे व्यापारियों के लिए आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण का एक मजबूत माध्यम बनकर उभरी है।
