मध्यप्रदेश में 15 जुलाई से शुरू होगा ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान, युवाओं को नशामुक्त बनाने के लिए चलेगा जनआंदोलन

मध्यप्रदेश में नशे के खिलाफ जनजागरूकता को नई गति देने के लिए पुलिस विभाग 15 जुलाई से 30 जुलाई 2026 तक राज्यव्यापी अभियान “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” शुरू करने जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य केवल मादक पदार्थों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक बनाकर इसे एक व्यापक जनआंदोलन का रूप देना भी है। अभियान के सफल संचालन को लेकर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर विस्तृत रणनीति और कार्ययोजना की समीक्षा की।
बैठक में अभियान के दौरान होने वाली गतिविधियों, विभागीय समन्वय और जनभागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि यह अभियान भारत सरकार के मादक पदार्थ नियंत्रण संबंधी विजन के अनुरूप संचालित किया जाएगा। इसके अंतर्गत मादक पदार्थों की रोकथाम, सिंथेटिक ड्रग्स और उनसे जुड़े अवैध नेटवर्क पर कार्रवाई, नशे की मांग में कमी लाने के प्रयास, जनजागरूकता अभियान और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय को प्रमुख आधार बनाया गया है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अभियान को केवल औपचारिक कार्यक्रम बनाकर सीमित न रखा जाए, बल्कि समाज के हर वर्ग को इससे जोड़कर इसे जनसहभागिता का आंदोलन बनाया जाए। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2025 में आयोजित पहले अभियान को प्रदेशभर में व्यापक जनसमर्थन मिला था और लाखों लोगों ने इसमें भाग लेकर नशामुक्त समाज का संदेश दिया था। इस बार लक्ष्य पहले से अधिक प्रभावी और व्यापक अभियान चलाने का है ताकि अधिक से अधिक लोग नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित हो सकें।
अभियान के दौरान पुलिस विभाग के साथ सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य, आबकारी, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, नगरीय निकाय और अन्य संबंधित विभाग मिलकर संयुक्त रूप से कार्यक्रम आयोजित करेंगे। प्रत्येक जिले में बहुविभागीय समन्वय के माध्यम से ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाएगी जिसमें समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जिला प्रशासन के सहयोग से स्थानीय स्तर पर विशेष समितियों का गठन किया जाए, जो अभियान की निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए भी व्यापक रणनीति तैयार की गई है। प्रमुख चौराहों, सार्वजनिक स्थलों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जागरूकता सामग्री प्रदर्शित की जाएगी। इसके अलावा सिनेमाघरों, एफएम रेडियो, सार्वजनिक परिवहन, एलईडी स्क्रीन और सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाया जाएगा, ताकि हर आयु वर्ग के नागरिक इस अभियान से जुड़ सकें।
पंद्रह दिनों तक चलने वाले इस अभियान में प्रतिदिन अलग-अलग विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें नशामुक्ति रैली, ड्रग अवेयरनेस रन, सामूहिक शपथ ग्रहण, स्कूल और कॉलेजों में व्याख्यान, लघु फिल्मों का प्रदर्शन, चित्रकला, निबंध, पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिताएं, रंगोली प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक, मानव श्रृंखला और सार्वजनिक संवाद जैसे कार्यक्रम शामिल रहेंगे। इसके अलावा धार्मिक स्थलों, औद्योगिक इकाइयों, जेलों और बाजारों में भी विशेष जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। खिलाड़ियों और खेल प्रशिक्षकों के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश भी दिया जाएगा।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि नशे की समस्या केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौती भी है। इसलिए इसकी रोकथाम के लिए पुलिस के साथ-साथ समाज, परिवार, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने सभी अधिकारियों से नवाचार अपनाने, प्रभावी जनसंपर्क बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ने का आह्वान किया।
30 जुलाई को अभियान का समापन विभिन्न जिलों में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों की उपस्थिति में किया जाएगा। इस दौरान अभियान के अनुभव साझा किए जाएंगे और प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए सामूहिक संकल्प लिया जाएगा। सरकार और पुलिस विभाग का विश्वास है कि जनभागीदारी के माध्यम से यह अभियान नशे के खिलाफ सामाजिक जागरूकता को नई दिशा देगा और युवाओं को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।
