मन की बात में पीएम मोदी ने की कश्मीर की पारंपरिक वगू चटाई की सराहना, गुलाम हुसैन और बेटी के प्रयासों को बताया प्रेरणादायक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड में कश्मीर की पारंपरिक वगू चटाई का विशेष उल्लेख करते हुए इसे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय शिल्प कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने इस पारंपरिक कला को पुनर्जीवित करने के लिए श्रीनगर के शिल्पकार गुलाम हुसैन और उनकी बेटी तंजीला के प्रयासों की सराहना की और कहा कि उनके समर्पण ने वर्षों पुरानी इस हस्तकला को नई पहचान दिलाने का काम किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब किसी व्यक्ति में हुनर के साथ कुछ नया करने का संकल्प भी होता है, तब कठिन से कठिन रास्ता भी आसान हो जाता है। उन्होंने बताया कि वगू चटाई कश्मीर की पारंपरिक हस्तशिल्प कला का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे सरकंडे, दलदली घास और धान के पुआल जैसी प्राकृतिक सामग्री से तैयार किया जाता है। यह पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद है और अपनी उपयोगिता के कारण आज भी बेहद खास माना जाता है।
उन्होंने बताया कि वगू चटाई बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह हाथों से होती है। सबसे पहले दलदली क्षेत्रों से सरकंडे और विशेष घास की कटाई की जाती है। इसके बाद इन्हें धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है, फिर छंटाई की जाती है और अंत में कुशल कारीगर इन्हें पारंपरिक तकनीक से बुनकर आकर्षक चटाई का रूप देते हैं। एक चटाई तैयार करने में दो कारीगरों को लगभग चार दिन का समय लगता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह गर्मियों में ठंडक और सर्दियों में गर्माहट का एहसास कराती है, जिससे इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है।
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि एक समय ऐसा था जब कश्मीर के लगभग हर घर में वगू चटाई का उपयोग होता था, लेकिन समय के साथ इसकी मांग घटने लगी और यह परंपरा धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगी। ऐसे समय में श्रीनगर के गुलाम हुसैन और उनकी बेटी तंजीला ने इस पारंपरिक कला को बचाने का संकल्प लिया। सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार इस शिल्प को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि गुलाम हुसैन के समर्पण और मेहनत से धीरे-धीरे अन्य लोग भी इस अभियान से जुड़ते गए। स्थानीय स्तर पर मिले सहयोग ने इस पारंपरिक कला को नया जीवन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज वगू चटाई केवल कश्मीर तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश के कई हिस्सों में इसकी मांग बढ़ रही है और लोग इसे पारंपरिक हस्तशिल्प के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल घरेलू उत्पाद के रूप में भी पसंद कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का भी उल्लेख करते हुए देशवासियों से स्थानीय उत्पादों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक कलाएं और हस्तशिल्प हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं और इन्हें बढ़ावा देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कश्मीर की वगू चटाई जैसे स्वदेशी उत्पादों को अपने घरों का हिस्सा बनाएं, ताकि स्थानीय कारीगरों को नई पहचान मिले, उनकी आजीविका मजबूत हो और भारत की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।
