मॉनसून का कहर: बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहे कई राज्य, राहत-बचाव में जुटी केंद्र सरकार और एनडीआरएफ

देशभर में जारी मॉनसून के बीच कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। कई इलाकों में बाढ़, जलभराव और भूस्खलन जैसी परिस्थितियां सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। प्रभावित राज्यों में हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और विभिन्न केंद्रीय एजेंसियां राज्य सरकारों के साथ समन्वय बनाकर राहत कार्यों को गति दे रही हैं। उद्देश्य यह है कि किसी भी आपात स्थिति में लोगों तक समय पर सहायता पहुंचे और नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।
मॉनसून के दौरान मौसम की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए गृह मंत्रालय का एकीकृत नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे सक्रिय है। यह नियंत्रण कक्ष भारत मौसम विज्ञान विभाग, केंद्रीय जल आयोग और भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केन्द्र समेत कई प्रमुख संस्थाओं के साथ मिलकर लगातार मौसम और जलस्तर की निगरानी कर रहा है। इन एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर राज्य और जिला स्तर के आपात संचालन केंद्रों को समय-समय पर अलर्ट भेजे जा रहे हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन पहले से आवश्यक तैयारियां कर सके और संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।
जुलाई 2026 के दौरान पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों के अलावा पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव तथा जम्मू-कश्मीर में लगातार बारिश और भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गई हैं। कई स्थानों पर सड़क संपर्क बाधित हुआ है, जबकि कुछ इलाकों में सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और आवश्यक सेवाओं को बहाल करने में जुटा हुआ है।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमें विभिन्न राज्यों में राज्य आपदा मोचन बल, स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर लगातार राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से ही विशेष टीमें तैनात कर दी गई थीं, जिससे आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव हो सकी। पिछले एक सप्ताह के दौरान एनडीआरएफ ने 52 लोगों को सुरक्षित बचाया, जबकि 2,206 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में सफलता हासिल की। राहत शिविरों में लोगों को भोजन, चिकित्सा सुविधा और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को और प्रभावी बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। सेना और अन्य रक्षा संसाधनों का उपयोग जरूरत वाले क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित निकालने, राहत सामग्री पहुंचाने और कठिन इलाकों तक सहायता उपलब्ध कराने के लिए किया जा रहा है। इससे उन स्थानों पर राहत अभियान को गति मिली है, जहां सामान्य साधनों से पहुंचना कठिन था।
मॉनसून शुरू होने से पहले ही संभावित आपदाओं से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां की गई थीं। मई और जून 2026 के दौरान उच्चस्तरीय बैठकों में लू, बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन जैसी परिस्थितियों से निपटने की रणनीति की समीक्षा की गई थी। चार धाम यात्रा मार्ग सहित संवेदनशील क्षेत्रों की तैयारियों पर भी लगातार नजर रखी गई, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
प्रभावित राज्यों में नुकसान का आकलन करने के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीमें भी लगातार दौरे कर रही हैं। इनका उद्देश्य वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन कर आवश्यक वित्तीय सहायता और पुनर्वास कार्यों को गति देना है। हाल की बारिश का एक सकारात्मक पहलू यह भी सामने आया है कि देश में वर्षा की कमी में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। पहले जहां वर्षा में लगभग 30 प्रतिशत की कमी का अनुमान लगाया जा रहा था, वहीं लगातार हुई बारिश के बाद यह घटकर लगभग 15 प्रतिशत रह गई है। हालांकि कई क्षेत्रों में राहत की यह बारिश लोगों के लिए चुनौती भी बन गई है, लेकिन प्रशासन का दावा है कि समन्वित प्रयासों के जरिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित लोगों तक हरसंभव सहायता पहुंचाने का कार्य जारी है।
