संसद में फिर हंगामा, विपक्ष के विरोध के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित

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संसद के मानसून सत्र में एक बार फिर विपक्ष के हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही प्रभावित हुई। विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्षी सांसदों के विरोध और नारेबाजी के बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही पहले अलग-अलग समय पर स्थगित की गई और बाद में दोनों सदनों को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। विपक्षी सांसद छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बयान की मांग कर रहे थे।

सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल शुरू कराने का प्रयास किया। हालांकि, विपक्षी सदस्य अपनी मांग को लेकर सदन में विरोध करने लगे। विपक्ष की ओर से छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया और गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले पर सदन में बयान देने की मांग की गई।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि गृह मंत्री अमित शाह छात्रों से जुड़े मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष की प्रमुख मांगों को स्वीकार किया जा चुका है, इसलिए सदन की कार्यवाही चलने देने में सहयोग किया जाना चाहिए।

ओम बिरला ने प्रश्नकाल के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल संसद का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, क्योंकि इसके जरिए सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित होती है। उन्होंने सदस्यों से संसदीय परंपराओं और मर्यादा का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि सदन में तख्तियां और बैनर लाना संसदीय नियमों के अनुरूप नहीं है।

लगातार हो रहे हंगामे पर लोकसभा अध्यक्ष ने नाराजगी और दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सदन में कई महत्वपूर्ण विधेयक लंबित हैं, जिन पर राष्ट्रीय हित में चर्चा जरूरी है। लेकिन विपक्षी सदस्यों का विरोध जारी रहने के कारण प्रश्नकाल सुचारू रूप से नहीं चल सका। इसके बाद अध्यक्ष ने लोकसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

राज्यसभा में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद विपक्षी सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी की। पहले स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे सभापति सीपी राधाकृष्णन ने प्रश्नकाल शुरू कराने की कोशिश की, लेकिन लगातार हो रहे हंगामे के कारण कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने अपतटीय पवन ऊर्जा के विकास से जुड़े एक सवाल का जवाब देने का प्रयास किया, लेकिन विपक्ष की नारेबाजी के बीच वह अपना जवाब पूरा नहीं कर सके। हंगामा बढ़ने पर राज्यसभा की कार्यवाही भी दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई।

इससे पहले दोनों सदनों में मंत्रियों ने अपने-अपने मंत्रालयों से संबंधित दस्तावेज सदन के पटल पर रखे। आवासन और शहरी मामलों, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता से जुड़ी संसदीय स्थायी समितियों की रिपोर्ट भी सदन में पेश की गईं।

राज्यसभा में हंगामे के बीच सभापति ने शून्यकाल शुरू कराया, लेकिन केवल बीजेडी के डॉ. संतृप्त मिश्रा ही सार्वजनिक महत्व के मुद्दे को सदन में उठा सके। लगातार विरोध के कारण पहले राज्यसभा को दोपहर 12 बजे तक और बाद में दोपहर दो बजे तक स्थगित करना पड़ा। संसद में जारी गतिरोध के चलते अब नजर इस बात पर है कि आगे की कार्यवाही में सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हो पाती है या नहीं।

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