सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को मिली रफ्तार, उज्जैन में 778 करोड़ के घाट निर्माण और 920 करोड़ की कान्ह डायवर्शन परियोजना का निरीक्षण

उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ 2028 को भव्य, दिव्य और विश्वस्तरीय स्वरूप देने के लिए तैयारियां तेज गति से आगे बढ़ रही हैं। इसी क्रम में राज्य और केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेतृत्व ने शहर में चल रही महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का निरीक्षण कर उनकी प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान श्रद्धालुओं की सुविधाओं, शिप्रा नदी की स्वच्छता और धार्मिक पर्यटन को बेहतर बनाने से जुड़ी योजनाओं पर विशेष जोर दिया गया। आगामी सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है, जिससे देश और विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
निरीक्षण के दौरान सबसे अधिक ध्यान शिप्रा नदी के किनारे बनाए जा रहे नए घाटों पर केंद्रित रहा। सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। इसी आवश्यकता को देखते हुए लगभग 29 किलोमीटर से अधिक लंबाई में आधुनिक घाटों का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित, व्यवस्थित और सुविधाजनक स्नान व्यवस्था उपलब्ध कराना है। निर्माण कार्य के अंतर्गत घाटों को मजबूत संरचना, बेहतर पहुंच मार्ग और आवश्यक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है ताकि भविष्य में भी इनका उपयोग लंबे समय तक किया जा सके।
अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट के अनुसार परियोजना का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। घाट निर्माण के साथ-साथ नदी तटों की सुरक्षा के लिए रिटेनिंग वॉल का निर्माण भी किया जा रहा है। इससे नदी किनारों का संरक्षण होगा और भारी भीड़ के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए अनेक प्रवेश और निकास बिंदु भी विकसित किए जा रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। नदी तट क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपित किए गए, जिससे हरित क्षेत्र का विस्तार हो और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखा जा सके। प्रशासन का मानना है कि धार्मिक आयोजनों के साथ पर्यावरण संरक्षण को जोड़ना समय की आवश्यकता है और इससे आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं हरित वातावरण मिल सकेगा।
इसके अलावा कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। यह परियोजना उज्जैन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य कान्ह नदी के दूषित जल को शिप्रा नदी में मिलने से रोकना है। वर्षों से शिप्रा नदी की स्वच्छता को बनाए रखने की चुनौती रही है और इस परियोजना को उसी समस्या के स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है। योजना के तहत दूषित जल को विशेष क्लोज डक्ट और टनल प्रणाली के माध्यम से शहर से दूर ले जाकर छोड़ा जाएगा, जिससे शिप्रा नदी का जल धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अधिक स्वच्छ बना रहेगा।
परियोजना के तकनीकी हिस्से का निरीक्षण करते हुए निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि टनल निर्माण, शाफ्ट विकास और प्री-कास्ट संरचनाओं का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना को भविष्य की जनसंख्या वृद्धि और बढ़ती आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, ताकि आने वाले वर्षों में भी यह प्रभावी रूप से कार्य कर सके।
सिंहस्थ 2028 को लेकर चल रहे इन विकास कार्यों से स्पष्ट है कि उज्जैन को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन दृष्टि से और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। घाट निर्माण और नदी संरक्षण जैसी परियोजनाएं न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव प्रदान करेंगी, बल्कि शहर के दीर्घकालिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
