सीमावर्ती गांवों से जुड़ें युवा, विकसित भारत की नींव बनेंगे गांव: प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं से सीमावर्ती गांवों के साथ गहरा जुड़ाव बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश के गांव मजबूत और आत्मनिर्भर बनेंगे। उन्होंने विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के प्रतिभागियों से वर्चुअल माध्यम से संवाद करते हुए युवाओं की भूमिका को राष्ट्र निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का युवा वर्ग केवल देश के भविष्य का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि विकसित भारत अभियान का सबसे बड़ा भागीदार और लाभार्थी भी है।

उन्होंने कहा कि जब युवाओं की ऊर्जा और सोच को देश की वास्तविक चुनौतियों को समझने और उनके समाधान खोजने की दिशा में लगाया जाता है, तब सकारात्मक बदलाव की मजबूत नींव तैयार होती है। युवाओं का जमीनी स्तर पर जाकर लोगों के जीवन, उनकी समस्याओं और संभावनाओं को समझना भारत के समावेशी विकास को नई गति देता है। यही सोच विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की मूल भावना भी है, जिसके माध्यम से युवाओं को सीमावर्ती गांवों तक पहुंचने, वहां के लोगों के साथ समय बिताने और उनकी संस्कृति, जीवनशैली तथा विकास यात्रा को करीब से देखने का अवसर मिला।

प्रधानमंत्री ने बताया कि इस पहल को देशभर के युवाओं से उत्साहजनक समर्थन मिला। लगभग तीन लाख युवाओं ने इस कार्यक्रम से जुड़ने के लिए प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जिनमें से 400 से अधिक प्रतिभागियों का चयन किया गया। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए इन युवाओं ने सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा कर अपने अनुभव साझा किए और स्थानीय लोगों के जीवन को समझने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सीमावर्ती गांवों को देश के आखिरी गांव के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब सरकार उन्हें देश का पहला गांव मानकर विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है। इसी सोच के कारण कई ऐसे गांव, जहां वर्षों तक बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई थीं, वहां अब सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन गांवों के लोगों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद हमेशा राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण और देशभक्ति का परिचय दिया है, इसलिए उनका विकास राष्ट्रीय प्राथमिकता होना चाहिए।

संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने भारतीय संस्कृति की उस परंपरा का भी उल्लेख किया, जिसमें सामूहिक प्रयासों को हमेशा विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज में लोग मिलकर काम करने, साथ गाने और एक-दूसरे का सहयोग करने की परंपरा निभाते आए हैं। यही भावना समाज में एकता, विश्वास और सहयोग को मजबूत बनाती है तथा विकास की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और आनंददायक बनाती है। उन्होंने कहा कि सरकार भी विकास की मुख्यधारा से लंबे समय तक दूर रहे लोगों को प्राथमिकता देकर उन्हें सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।

प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई युवा अपनी यात्रा व्यक्तिगत रूप से शुरू करके गए थे, लेकिन लौटते समय वे एक बड़े परिवार का हिस्सा बन चुके थे। उनके भीतर राष्ट्रीय एकता, सामाजिक जिम्मेदारी और देश के प्रति अपनापन पहले से कहीं अधिक मजबूत होकर सामने आया। उन्होंने विशेष रूप से उन युवतियों की सराहना की जिन्होंने आत्मविश्वास और साहस के साथ इस यात्रा में भाग लिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की प्रत्येक बेटी को अवसर, सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि वे हर क्षेत्र में आगे बढ़कर भारत के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे कार्यक्रम आने वाले समय में युवाओं और सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच मजबूत संबंध स्थापित करेंगे और विकसित भारत के लक्ष्य को नई गति देंगे।

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