हथाईखेड़ा सिविल अस्पताल का निरीक्षण, मंत्री कृष्णा गौर ने कहा- मरीजों को मिले बेहतर इलाज, हर माह होगी स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा

मध्यप्रदेश सरकार सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने हथाईखेड़ा सिविल अस्पताल का निरीक्षण किया और रोगी कल्याण समिति की बैठक में अस्पताल की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अस्पताल में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा प्रत्येक मरीज को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
बैठक के दौरान राज्यमंत्री ने अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं, बुनियादी सुविधाओं और मरीजों को मिलने वाले उपचार की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि अस्पताल में यदि किसी प्रकार की कमी या समस्या सामने आती है तो उसका समाधान तुरंत किया जाए। समस्याओं को लंबित रखने के बजाय नियमित निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा प्रत्येक माह की जाए, जिससे आवश्यक सुधार लगातार होते रहें और सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर वृद्धि हो।
राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को केवल अस्पताल परिसर तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। आम लोगों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के लिए विभिन्न बस्तियों और आवासीय क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर तथा जागरूकता अभियान आयोजित किए जाएं। इन शिविरों के माध्यम से लोगों को बीमारियों की समय पर पहचान, रोकथाम और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी जाए, ताकि अधिक से अधिक नागरिक सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं का लाभ उठा सकें। उन्होंने अधिकारियों से जनसंपर्क बढ़ाने और समुदाय के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने पर भी विशेष जोर दिया।
निरीक्षण के दौरान राज्यमंत्री ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों का दौरा कर भर्ती मरीजों से सीधे बातचीत की। उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से उपचार व्यवस्था, चिकित्सकों की उपलब्धता, दवाओं की आपूर्ति, साफ-सफाई और अस्पताल स्टाफ के व्यवहार के संबंध में फीडबैक प्राप्त किया। मरीजों से मिले सुझावों और अनुभवों के आधार पर उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए ताकि अस्पताल में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानजनक और संतोषजनक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
अस्पताल निरीक्षण के दौरान उन्होंने वार्डों की साफ-सफाई, चिकित्सा उपकरणों की कार्यशीलता और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता का भी बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में सभी आवश्यक संसाधन हमेशा उपलब्ध रहने चाहिए और चिकित्सा उपकरण पूरी तरह कार्यशील स्थिति में हों, ताकि किसी भी मरीज के उपचार में देरी न हो। साथ ही उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को निर्देशित किया कि मरीजों की सुविधा से जुड़ी प्रत्येक व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जाए और समय-समय पर उसका मूल्यांकन किया जाए।
राज्यमंत्री ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में लोगों का विश्वास मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण उपचार, संवेदनशील व्यवहार, स्वच्छ वातावरण और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नियमित समीक्षा, बेहतर प्रबंधन और जनभागीदारी के माध्यम से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यप्रणाली और अधिक प्रभावी बनेगी तथा आम नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
