होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का सख्त रुख, तय समुद्री मार्ग से ही गुजरेंगे जहाज, 11 हजार नाविकों की निकासी की तैयारी

मध्य पूर्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान ने एक बार फिर अपना स्पष्ट और सख्त रुख सामने रखा है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने साफ कर दिया है कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले सभी व्यापारिक और अन्य जहाजों को केवल उन्हीं समुद्री रास्तों का इस्तेमाल करना होगा जिन्हें ईरानी अधिकारियों ने आधिकारिक रूप से निर्धारित किया है। निर्धारित मार्गों से हटकर किसी भी अन्य रास्ते से जहाजों की आवाजाही को न केवल प्रतिबंधित बताया गया है, बल्कि उसे गंभीर सुरक्षा जोखिम भी माना गया है।
आईआरजीसी का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट अत्यंत संवेदनशील समुद्री क्षेत्र है और यहां सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए तय किए गए मार्गों का पालन करना सभी जहाजों के लिए अनिवार्य है। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित समुद्री गलियारों से बाहर जाने वाले जहाज अपनी सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं। ऐसे में सभी जहाजों को आधिकारिक निर्देशों का पालन करते हुए ही इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई व्यवस्थाओं पर चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में ओमान ने इस जलमार्ग से बाहर जाने वाले जहाजों के लिए नए परिचालन दिशा-निर्देश जारी किए थे, ताकि समुद्री यातायात अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके। इसी बीच ईरान ने अपने अधिकार क्षेत्र में लागू नियमों को दोहराते हुए स्पष्ट कर दिया कि उसके द्वारा निर्धारित समुद्री मार्ग ही वैध माने जाएंगे।
कुछ समय पहले ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने और समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने के उद्देश्य से एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत ईरान ने सीमित अवधि के लिए व्यापारिक जहाजों को बिना अतिरिक्त शुल्क के सुरक्षित आवाजाही की सुविधा देने पर सहमति जताई थी। इसके बाद क्षेत्र में समुद्री व्यापार को फिर से गति मिलने की उम्मीद बढ़ी थी और कई देशों ने इसे वैश्विक आपूर्ति शृंखला के लिए सकारात्मक कदम माना था।
इसी क्रम में ईरान और ओमान ने भी होर्मुज स्ट्रेट के भविष्य के प्रबंधन को लेकर सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। दोनों देशों ने एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति व्यक्त की है, जो इस रणनीतिक जलमार्ग में जहाजों की सुरक्षित और व्यवस्थित आवाजाही से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मिलकर काम करेगा। दोनों पक्षों ने यह भी दोहराया कि वे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के अनुरूप सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
दूसरी ओर, इस क्षेत्र में लंबे समय से फंसे हजारों नाविकों को सुरक्षित निकालने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समुद्री सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने लगभग 11 हजार से अधिक नाविकों की निकासी के लिए विशेष अभियान की तैयारी पूरी कर ली है। इसके लिए आवश्यक सुरक्षा मंजूरियां प्राप्त कर ली गई हैं और समुद्री मार्गों की सुरक्षा का आकलन भी पूरा कर लिया गया है। इस अभियान में क्षेत्र के कई देशों और समुद्री उद्योग से जुड़े संगठनों का सहयोग लिया जाएगा, ताकि निकासी प्रक्रिया सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पूरी की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ऐसे में यहां सुरक्षा व्यवस्था, समुद्री नियमों का पालन और विभिन्न देशों के बीच समन्वय न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में ईरान, ओमान और अन्य संबंधित देशों के बीच होने वाली बातचीत इस महत्वपूर्ण जलमार्ग के भविष्य और अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
