“तंबाकू सेक्टर में 40% GST भी कम पड़ रहा है: वित्तमंत्री सीतारमण”

नई दिल्ली। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने तंबाकू क्षेत्र में हो रही टैक्स चोरी को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि सरकार लगातार इस सेक्टर पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि तंबाकू उत्पादों पर वर्तमान में 40 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है, लेकिन इसके बावजूद राजस्व संग्रह अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा है। उनके अनुसार, इस क्षेत्र में टैक्स चोरी इतनी अधिक है कि 40 प्रतिशत की दर भी कम लगने लगी है, क्योंकि वास्तविक टैक्स सरकार तक पहुंच ही नहीं पाता।
सीतारमण ने बताया कि तंबाकू उद्योग में लंबे समय से अवैध व्यापार की समस्या बनी हुई है। बड़ी मात्रा में गैर-करयुक्त और बिना बिल के तंबाकू उत्पादों की बिक्री होती है, जिससे जीएसटी का नुकसान करोड़ों रुपये में पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन अभी भी सुधार की काफी गुंजाइश है। वित्तमंत्री ने यह भी जोड़ा कि कुछ कारोबारी जान-बूझकर अंडर-इनवॉइसिंग करते हैं, जिससे टैक्स देनदारी कम हो जाती है और सरकार को नुकसान होता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति निर्धारकों का मानना है कि तंबाकू पर उच्च टैक्स लगाने का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि इसके उपभोग को कम करना भी है। ऐसे में टैक्स चोरी सीधे तौर पर जन-स्वास्थ्य पर असर डालती है, क्योंकि अवैध उत्पाद अक्सर सस्ते दरों पर उपलब्ध होते हैं, जिससे इनके उपभोग में कमी नहीं आती। वित्तमंत्री ने कहा कि तंबाकू स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है और सरकार का प्रयास है कि न सिर्फ इसके उपयोग को नियंत्रित किया जाए, बल्कि राजस्व का सही उपयोग स्वास्थ्य कार्यक्रमों में किया जाए।
सरकार अब टैक्स चोरी रोकने के लिए तकनीकी समाधान अपनाने पर जोर दे रही है। सीतारमण ने संकेत दिया कि आने वाले समय में तंबाकू उत्पादों की सप्लाई चेन को ट्रैक करने के लिए डिजिटल टैगिंग, सख्त चेकिंग, और विशेष निगरानी तंत्र लागू किए जा सकते हैं। सरकार राज्यों के साथ समन्वय कर छापेमारी और कार्रवाई को तेज करने की भी योजना बना रही है।
वित्तमंत्री के बयान को विशेषज्ञ तंबाकू सेक्टर में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि यदि टैक्स चोरी पर प्रभावी रोक लगाई गई, तो न सिर्फ सरकारी आमदनी बढ़ेगी, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। सरकार अब इस दिशा में और ठोस कदम उठाने की तैयारी में है।
