निर्जला एकादशी 2026: त्रिवेणी संगम में उमड़ा आस्था का सैलाब, श्रद्धालुओं ने किया पुण्य स्नान और दान

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निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह होते ही हजारों श्रद्धालु संगम तट पर पहुंचने लगे और गंगा, यमुना तथा अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान कर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। पूरे क्षेत्र में भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और विश्व कल्याण की कामना की।

निर्जला एकादशी हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धालु बिना जल और अन्न ग्रहण किए भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। माना जाता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत व्यक्ति को विशेष पुण्य प्रदान करता है। यही कारण है कि देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पर्व को अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं।

प्रयागराज में संगम तट पर सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। कई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ पहुंचे, जबकि कुछ लोग दूर-दराज के राज्यों से विशेष रूप से इस अवसर पर संगम स्नान करने आए थे। स्नान के बाद लोगों ने मंदिरों में दर्शन किए और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। घाटों पर भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार की ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि महाभारत काल में भीमसेन ने इस व्रत को धारण किया था, जिसके बाद इसका महत्व और अधिक बढ़ गया। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति पूरे वर्ष की सभी एकादशियों का व्रत नहीं कर पाता, उसे निर्जला एकादशी का व्रत करने से सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त हो सकता है। यही वजह है कि इस दिन का धार्मिक महत्व अन्य एकादशियों की तुलना में अधिक माना जाता है।

इस अवसर पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालुओं ने जरूरतमंद लोगों को फल, पानी, वस्त्र, पंखे और अन्य उपयोगी वस्तुएं दान कीं। धार्मिक मान्यता है कि गर्मी के मौसम में किए गए ऐसे दान से विशेष पुण्य प्राप्त होता है और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, प्रसाद और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की।

उधर, हरिद्वार सहित देश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी निर्जला एकादशी को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना आयोजित की गई और श्रद्धालुओं ने भगवान नारायण के नाम का जप कर आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने का प्रयास किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान नारायण का संबंध जल तत्व से माना जाता है, इसलिए इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है।

श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। घाटों और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। दिनभर श्रद्धालुओं का आगमन जारी रहा और शाम की आरती तक धार्मिक उत्साह चरम पर बना रहा। निर्जला एकादशी का यह पर्व एक बार फिर भारतीय संस्कृति, आस्था और सनातन परंपराओं की जीवंत झलक प्रस्तुत करता नजर आया।

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