बीआरओ प्रोजेक्ट ब्रह्मांक के 16 साल पूरे, अरुणाचल में 811 किमी सड़क और 86 पुलों से मजबूत हुई सीमाई कनेक्टिविटी

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सीमा सड़क संगठन की प्रोजेक्ट ब्रह्मांक ने अपने 16वें स्थापना दिवस के अवसर पर पूर्वोत्तर भारत में पिछले डेढ़ दशक के दौरान किए गए महत्वपूर्ण अवसंरचनात्मक कार्यों को नई पहचान दी है। अरुणाचल प्रदेश के राणाघाट में आयोजित समारोह केवल एक स्थापना दिवस का आयोजन नहीं था, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क, रणनीतिक मजबूती और दूरदराज के इलाकों के विकास की दिशा में लगातार जारी प्रयासों का प्रतीक भी बना। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद परियोजना ने जिस तरह से काम किया है, उसने पूर्वोत्तर क्षेत्र में आवागमन और सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान की है।

प्रोजेक्ट ब्रह्मांक की जिम्मेदारी अरुणाचल प्रदेश के सियांग, पूर्वी सियांग, पश्चिमी सियांग, ऊपरी सियांग और शि-योमी जैसे संवेदनशील जिलों के अलावा असम के धेमाजी जिले के कुछ हिस्सों तक फैली हुई है। ये सभी क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं, जहां मजबूत सड़क नेटवर्क और आधुनिक पुलों का निर्माण सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय लोगों के जीवन को भी आसान बनाता है। परियोजना का उद्देश्य केवल सेना की आवाजाही को सुगम बनाना नहीं है, बल्कि सीमावर्ती गांवों को बेहतर संपर्क उपलब्ध कराकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ना भी है।

वर्तमान समय में प्रोजेक्ट ब्रह्मांक लगभग 811 किलोमीटर लंबी सड़कों और 86 पुलों के निर्माण एवं रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रही है। इन पुलों में छोटे पुलों से लेकर आधुनिक स्टील और मेहराबदार संरचनाएं शामिल हैं, जो कठिन पर्वतीय इलाकों में बेहतर यातायात सुनिश्चित करती हैं। परियोजना की प्रमुख उपलब्धियों में सियोम नाले पर बनाया गया 100 मीटर लंबा स्टील आर्च ब्रिज और अलोंग-यिंगकिओंग मार्ग पर सिमांग नाले के ऊपर निर्मित 165 मीटर लंबा प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट पुल विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन संरचनाओं ने क्षेत्र की संपर्क व्यवस्था को पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत बनाया है।

वित्त वर्ष 2025-26 परियोजना के लिए उपलब्धियों से भरा रहा। इस अवधि में सियांग और सियोम घाटियों में कुल 390 मीटर लंबाई वाले 13 नए पुल तैयार कर लोगों और सुरक्षा बलों के लिए खोल दिए गए। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग डबल लेन मानकों के अनुरूप 61 किलोमीटर सड़कों का पक्कीकरण भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इसके अलावा दूरस्थ इलाकों में आपातकालीन जरूरतों और तेज संपर्क व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए हेलीपैड जैसी सुविधाओं का भी विकास किया गया, जिससे आपदा प्रबंधन और सैन्य गतिविधियों दोनों को गति मिली है।

स्थापना दिवस के अवसर पर परियोजना मुख्यालय और विभिन्न टास्क फोर्स केंद्रों पर कई सामाजिक और कल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए गए। सैनिक सम्मेलन, अधिकारियों और जवानों के बीच संवाद तथा सामूहिक भोज जैसे आयोजनों ने संगठन के भीतर आपसी सहयोग और टीम भावना को और मजबूत किया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल उपलब्धियों का उत्सव मनाना नहीं था, बल्कि उन कर्मियों का सम्मान करना भी था जो कठिन परिस्थितियों में लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

29 जून 2011 को स्थापित यह परियोजना दिसंबर 2011 से पूर्ण रूप से सक्रिय है। तब से लेकर अब तक लगातार भारी वर्षा, भूस्खलन, दुर्गम पहाड़ी रास्तों और सीमित संसाधनों जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए प्रोजेक्ट ब्रह्मांक ने उल्लेखनीय कार्य किया है। आज यह परियोजना सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक संपर्क को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बेहतर सड़क और पुलों के निर्माण से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और आपदा राहत जैसी आवश्यक सेवाओं की पहुंच पहले की तुलना में काफी आसान हुई है। यही कारण है कि प्रोजेक्ट ब्रह्मांक आज पूर्वोत्तर भारत के विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।

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