मध्यप्रदेश का जल गंगा संवर्धन अभियान बना जनआंदोलन, 5970 जल संरक्षण कार्यों से मजबूत होगी जल सुरक्षा

मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और जल संवर्धन को जनभागीदारी से जोड़ने के उद्देश्य से चलाया गया जल गंगा संवर्धन अभियान इस वर्ष भी सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 19 मार्च से 30 जून तक चले इस व्यापक अभियान के दौरान प्रदेशभर में जल स्रोतों के संरक्षण, मरम्मत और पुनर्जीवन से जुड़े हजारों कार्य किए गए। अभियान का उद्देश्य केवल जल संरचनाओं का विकास करना नहीं था, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को जल संरक्षण की आवश्यकता के प्रति जागरूक बनाकर इसे जनआंदोलन का स्वरूप देना भी था।
अभियान की सफलता से संबंधित विस्तृत पुस्तिका मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए विभाग के अधिकारियों और पूरी टीम की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है और प्रदेश सरकार इस दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त जल संसाधन सुरक्षित रखे जा सकें।
जल संसाधन मंत्री ने बताया कि प्रदेश में यह अभियान लगातार तीसरे वर्ष सफलतापूर्वक आयोजित किया गया है। हर वर्ष मानसून से पहले जल स्रोतों की सफाई, मरम्मत और संरक्षण के कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए जाते हैं, जिससे बारिश के दौरान अधिक से अधिक पानी का संग्रहण हो सके। इस वर्ष अभियान की शुरुआत इंदौर से हुई और इसके बाद पूरे प्रदेश के गांवों और शहरों में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ा गया।
अभियान के दौरान जल संसाधन विभाग ने बड़ी संख्या में जल संरचनाओं के संरक्षण और सुधार का कार्य किया। जलाशयों और तालाबों के आसपास से अतिक्रमण हटाया गया, नहरों की सफाई और सुदृढ़ीकरण किया गया तथा जल संरचनाओं के किनारों पर फेंसिंग और पौधारोपण कराया गया। इसके अलावा तालाबों की पिचिंग, घाटों की मरम्मत, बोल्डर टो निर्माण, स्टॉप डैम, बैराज, वियर और स्लूस गेट की मरम्मत जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए गए। जलाशयों में रिसाव रोकने के लिए भी आवश्यक तकनीकी सुधार किए गए, जिससे भविष्य में जल संग्रहण क्षमता और अधिक प्रभावी हो सके।
अभियान के अंतर्गत पूरे प्रदेश में कुल 5970 विकास एवं संरक्षण कार्य संपन्न किए गए। इनमें सभी नौ नदी कछार क्षेत्रों में लघु सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े 531 कार्य भी शामिल रहे। इन परियोजनाओं के पूरा होने से सिंचाई सुविधाओं में सुधार होगा, कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही वर्षा जल के बेहतर संरक्षण से भूजल स्तर में सुधार और जल संकट की समस्या को कम करने में भी मदद मिलेगी।
प्रदेश सरकार का मानना है कि जल संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। इसी सोच के साथ जल गंगा संवर्धन अभियान को जनआंदोलन का रूप दिया गया, जिसमें नागरिकों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सरकार को उम्मीद है कि इस अभियान से जल संरक्षण के प्रति लोगों में स्थायी जागरूकता विकसित होगी और मध्यप्रदेश जल सुरक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।
