मध्यप्रदेश के पैरामेडिकल छात्रों को बड़ी राहत, पंजीयन प्रक्रिया होगी आसान, समय पर होंगी परीक्षाएं और रिजल्ट

मध्यप्रदेश सरकार पैरामेडिकल शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और छात्र हितैषी बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि पैरामेडिकल विद्यार्थी प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत नींव हैं और भविष्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और शैक्षणिक गतिविधियों को समयबद्ध तरीके से संचालित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
मंत्रालय में आयोजित मध्यप्रदेश सह-चिकित्सीय परिषद की 26वीं वार्षिक बैठक में पैरामेडिकल शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान विद्यार्थियों को पंजीयन, परीक्षा और परिणाम से जुड़ी समस्याओं से राहत देने के लिए कई अहम निर्णय लिए गए। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों को अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण अपने शैक्षणिक सत्र या करियर में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के सभी क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं तय समय-सीमा के भीतर आयोजित की जाएं। इसके साथ ही परीक्षा परिणाम भी समय पर घोषित किए जाएं ताकि विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई, इंटर्नशिप और रोजगार संबंधी योजनाएं प्रभावित न हों। सरकार का मानना है कि समयबद्ध परीक्षा और परिणाम किसी भी शैक्षणिक व्यवस्था की विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण आधार होते हैं।
पंजीयन प्रक्रिया को अधिक सरल और डिजिटल बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया। बैठक में अन्य राज्यों से पंजीकृत पैरामेडिकल विद्यार्थियों के लिए मध्यप्रदेश में पंजीयन के दौरान अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी की अनिवार्यता समाप्त करने पर सहमति बनी। इसके अलावा स्व-घोषणा और आधार आधारित ई-हस्ताक्षर प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को अधिक आसान बनाने का निर्णय लिया गया। दस्तावेजों के सत्यापन की व्यवस्था को भी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए गए ताकि विद्यार्थियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश के मान्यता प्राप्त संस्थानों से पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक सरल बनाया गया है। कम दस्तावेजों के साथ तेज़ी से पंजीयन पूरा करने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसके साथ ही अपूर्ण या त्रुटिपूर्ण ऑनलाइन आवेदनों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने और डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रमाण-पत्रों में क्यूआर कोड आधारित सत्यापन प्रणाली लागू करने का भी निर्णय लिया गया, जिससे प्रमाण-पत्रों की सत्यता की जांच आसान और सुरक्षित हो सके।
बैठक में परिषद की सेवा प्रदाय व्यवस्था और ऑनलाइन सेवाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि परिषद लंबे समय से लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत विभिन्न ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध करा रही है। पंजीयन, नवीनीकरण, माइग्रेशन, एनओसी, डुप्लीकेट प्रमाण-पत्र और अंकसूची जैसी सेवाओं के बड़ी संख्या में आवेदनों का समयबद्ध निराकरण किया गया है। अधिकांश सेवाओं में समाधान की दर 95 प्रतिशत से अधिक रही है, जबकि कई सेवाओं में यह 99 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। विद्यार्थियों और सह-चिकित्सीय पेशेवरों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए हेल्पडेस्क और कम्युनिकेशन सेल भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
बैठक के दौरान पैरामेडिकल संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों को मान्यता प्रदान करने के साथ-साथ नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में पैरामेडिकल शिक्षा का स्तर लगातार बेहतर हो, छात्रों को पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं मिलें तथा भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन तैयार किया जा सके।
