मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 10,800 करोड़ रुपये के विकास प्रस्ताव मंजूर, शहरों, किसानों और सिंचाई परियोजनाओं को मिलेगी नई रफ्तार

मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के समग्र विकास, किसानों के हितों की सुरक्षा और शहरी क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में करीब 10 हजार 800 करोड़ रुपये से अधिक के विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन निर्णयों का उद्देश्य प्रदेश में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, कृषि क्षेत्र को मजबूती देना, सिंचाई क्षमता बढ़ाना और शहरी विकास परियोजनाओं को गति प्रदान करना है।
बैठक में सबसे बड़ा निर्णय नगरीय अधोसंरचना विकास के लिए लिया गया, जिसके तहत अगले पांच वर्षों के लिए 8 हजार 445 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। यह धनराशि नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में सड़कों, जल निकासी, पेयजल, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य विकास कार्यों के साथ-साथ विभिन्न परियोजनाओं के लिए लिए गए ऋणों के पुनर्भुगतान में उपयोग की जाएगी। इससे प्रदेश के शहरों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार होने के साथ नागरिकों को बेहतर मूलभूत सेवाएं मिल सकेंगी।
कृषि क्षेत्र को राहत देने के उद्देश्य से मंत्रिपरिषद ने मूंग उपार्जन के लिए 1 हजार 587 करोड़ रुपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध कराने का निर्णय भी लिया है। यह व्यवस्था उन मूंग उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए की गई है जिनकी फसल का समर्थन मूल्य योजना के तहत निर्धारित लक्ष्य से अधिक मात्रा में उपार्जन किया गया था। इस फैसले के तहत विभिन्न बैंकों से ली गई साख सीमा के लिए सरकार वित्तीय गारंटी प्रदान करेगी, जिससे किसानों के भुगतान की प्रक्रिया सुचारु रूप से जारी रह सकेगी और कृषि व्यवस्था को वित्तीय मजबूती मिलेगी।
सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। राजगढ़ जिले की कुण्डलिया वृहद सिंचाई परियोजना को आगामी वित्त आयोग की अवधि तक निरंतर संचालित रखने के लिए 245 करोड़ 45 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। इस परियोजना का उद्देश्य बांध और सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से राजगढ़ तथा आगर-मालवा जिले के लगभग 1 लाख 39 हजार 600 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करना है। परियोजना के निरंतर संचालन से किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
महिला एवं बाल विकास से जुड़े मामलों में भी सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। टेक-होम राशन के उत्पादन और वितरण की जिम्मेदारी अब महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंप दी गई है। अंतरिम व्यवस्था के रूप में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही नई व्यवस्था लागू होने तक अल्पकालीन निविदा प्रक्रिया के जरिए टेक-होम राशन की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। भविष्य में केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्थायी व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि बच्चों और महिलाओं को पोषण सेवाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिलता रहे।
बैठक में वाणिज्यिक कर विभाग के कार्यालयों के सुचारु संचालन के लिए भी 521 करोड़ 4 लाख रुपये की मंजूरी दी गई। यह राशि आगामी पांच वर्षों तक मुख्यालय, जिला और परिक्षेत्रीय कार्यालयों के संचालन, कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, कार्यालयी खर्च, व्यावसायिक सेवाओं तथा आवश्यक संसाधनों के रखरखाव पर खर्च की जाएगी। सरकार का मानना है कि इन सभी निर्णयों से प्रदेश में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी, किसानों को राहत पहुंचेगी, शहरी अधोसंरचना मजबूत होगी और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सकेगा।
