राज्यसभा में विपक्ष का जोरदार हंगामा, नियम 267 पर चर्चा की मांग ठुकराई, कार्यवाही सोमवार तक स्थगित

संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में शुक्रवार को एक बार फिर जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी सांसद नियम 267 के तहत चर्चा कराने की मांग को लेकर लगातार नारेबाजी करते रहे। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के कई सदस्य अपनी सीटों से उठकर सभापति के आसन के समीप पहुंच गए और विशेष चर्चा की अनुमति देने की मांग पर अड़े रहे। लगातार बढ़ते शोर-शराबे और व्यवधान के बीच सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी और अंततः सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कार्यवाही सोमवार, 3 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति का ध्यान विपक्ष द्वारा दिए गए नोटिस की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने नियम 267 के तहत नोटिस देकर एक महत्वपूर्ण विषय पर तत्काल चर्चा की मांग की है। विपक्ष का कहना था कि हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस बल के इस्तेमाल को लेकर सदन में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। हालांकि सभापति ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और कहा कि इस प्रकार की मांग पहले भी की जा चुकी है तथा पूर्व में भी नियम 267 के तहत चर्चा की अनुमति नहीं दी गई थी।
सभापति के इस निर्णय के बाद विपक्षी सांसदों ने अपना विरोध और तेज कर दिया। सदन में लगातार नारेबाजी होती रही और कई सदस्य अपनी सीटों से आगे आकर विरोध दर्ज कराने लगे। शोर-शराबे के कारण सदन का सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ और निर्धारित कार्यवाही सुचारु रूप से आगे नहीं बढ़ सकी। कुछ समय तक आवश्यक कार्य करने का प्रयास किया गया, लेकिन हंगामा लगातार जारी रहने के कारण स्थिति सामान्य नहीं हो सकी।
इस दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतांत्रिक विमर्श और गंभीर चर्चा का सर्वोच्च मंच है, लेकिन विपक्ष का व्यवहार संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार सदन के भीतर जिस प्रकार का आचरण किया जा रहा है, उससे संसद की गरिमा प्रभावित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सार्थक चर्चा की बजाय केवल हंगामा और राजनीतिक टकराव का माहौल बनाना चाहता है।
शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक विषय पर चर्चा के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं और नियम मौजूद हैं, जिनका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लगातार नारेबाजी और व्यवधान से जनता के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा प्रभावित होती है और इससे संसद की कार्यक्षमता पर भी असर पड़ता है। उनके अनुसार सरकार हमेशा सार्थक संवाद के लिए तैयार रहती है, लेकिन सदन की कार्यवाही को बाधित करना लोकतांत्रिक परंपराओं के हित में नहीं माना जा सकता।
दूसरी ओर विपक्षी सांसद अपनी मांग पर अड़े रहे और उनका कहना था कि जिस विषय को लेकर उन्होंने नोटिस दिया है, वह सार्वजनिक महत्व का मामला है और उस पर तत्काल चर्चा कराई जानी चाहिए। हंगामे के बीच कुछ समय तक शून्यकाल की कार्यवाही चलाने का प्रयास किया गया, लेकिन विपक्षी सदस्य लगातार नारेबाजी करते रहे। आखिरकार लगातार बने गतिरोध को देखते हुए सभापति ने सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही संसद के मानसून सत्र का एक और दिन तीखी राजनीतिक नोकझोंक और गतिरोध के बीच समाप्त हुआ।
