लोकसभा में पेपर लीक विधेयक पर हंगामा, विपक्ष की नारेबाजी के बीच दोपहर 2 बजे तक स्थगित हुई कार्यवाही

संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में एक बार फिर जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों की लगातार नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी और अंततः लोकसभा अध्यक्ष को कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। इस दौरान सरकार की ओर से सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा कराने की तैयारी थी, लेकिन विपक्ष ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए लगातार विरोध जारी रखा।
सत्र की शुरुआत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सकारात्मक माहौल के साथ की। उन्होंने ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय खिलाड़ियों और पदक विजेताओं को बधाई दी। हालांकि, उनकी प्रारंभिक टिप्पणी के तुरंत बाद विपक्षी सांसद अपनी सीटों से खड़े होकर नारेबाजी करने लगे। सदन में शोर-शराबा बढ़ता गया और सामान्य कार्यवाही प्रभावित होने लगी।
लोकसभा अध्यक्ष ने कई बार विपक्षी सदस्यों से आग्रह किया कि वे प्रश्नकाल को बाधित न करें, क्योंकि यह संसद की कार्यवाही का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। उन्होंने सभी दलों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि प्रश्नकाल के बाद सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर विस्तृत चर्चा कराई जाएगी और सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा। इसके बावजूद विपक्षी सांसद शांत नहीं हुए और सदन में विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
इससे पहले सोमवार को भी स्थिति लगभग ऐसी ही रही थी। जब केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पेपर लीक विरोधी विधेयक सदन में पेश किया था, तब भी विपक्ष ने लगातार विरोध किया था, जिससे चर्चा आगे नहीं बढ़ सकी। सरकार का कहना है कि यह विधेयक देशभर में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है।
मंगलवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि लंबे समय से विपक्ष स्वयं पेपर लीक के खिलाफ कड़ा कानून बनाने की मांग करता रहा है और अब जब सरकार ऐसा विधेयक लेकर आई है तो उस पर गंभीर और रचनात्मक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के कई सांसद, विशेष रूप से युवा सांसद, इस महत्वपूर्ण विधेयक पर अपने विचार रखने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों से आग्रह किया कि वे छात्रों और युवाओं के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए बहस में भाग लें।
सदन की कार्यवाही के दौरान पीठासीन अधिकारी कृष्ण प्रसाद तेनेती ने भी विपक्षी सदस्यों से प्लेकार्ड हटाने और अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह कानून लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा हुआ है और संसद को इस विषय पर गंभीर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि देशभर के विद्यार्थी इस विधेयक को लेकर संसद की बहस पर नजर बनाए हुए हैं और उनसे सकारात्मक संदेश की अपेक्षा कर रहे हैं।
दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर सरकार को पहले जवाब देना चाहिए। इसी मांग को लेकर विपक्ष लगातार सदन में विरोध दर्ज करा रहा है। सरकार का पक्ष है कि पेपर लीक रोकने से संबंधित विधेयक राष्ट्रीय महत्व का विषय है और इसे प्राथमिकता के साथ चर्चा के लिए लिया जाना चाहिए।
लगातार हंगामे और व्यवधान के कारण सदन की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी, जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर क्या पेपर लीक विरोधी विधेयक पर सार्थक चर्चा हो पाएगी या फिर राजनीतिक गतिरोध के चलते संसद में एक बार फिर टकराव का माहौल देखने को मिलेगा।
