सहकारी ढांचा मजबूत करने पर फोकस, 2026 को ‘कृषि एवं किसान वर्ष’ के रूप में मनाने की तैयारी

सहकारिता विभाग के अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में आगामी वर्ष 2026 को ‘कृषि एवं किसान वर्ष’ के रूप में मनाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बैठक में कृषि विपणन सहकारी समितियों को मजबूत बनाने, ग्रामीण स्तर पर सहकारिता व्यवस्था को गति देने तथा प्राथमिकता के आधार पर सभी सहकारी समितियों के कंप्यूटराइजेशन के निर्देश दिए गए। सरकार का मानना है कि डिजिटल सहकारिता ढांचा किसानों को पारदर्शी, तेज तथा सुलभ सेवाएँ उपलब्ध कराने में क्रांतिकारी भूमिका निभाएगा।
पिछले दो वर्षों में सहकारिता विभाग ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ दर्ज की हैं, जिनसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारी ढांचे को नई मजबूती मिली है। पैक्स सोसायटी मैनेजरों की 1,099 भर्ती की गई, जिसमें 40% महिलाएं शामिल हैं। इससे न केवल पैक्स का संचालन मजबूत हुआ है, बल्कि महिलाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और नेतृत्व दोनों के अवसर मिले हैं।
ऑनलाइन ऑडिट के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने पूरे देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। ऑडिट प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण से सहकारी संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। इसके अलावा, नई एम पैक्स, डेयरी सहकारी समितियों और मत्स्य सहकारी समितियों को मिलाकर कुल 1,601 नई समितियों का राज्य में गठन हुआ, जिसने सहकारिता के दायरे को व्यापक बनाया है।
ग्रामीण सेवाओं के विस्तार के लिए जन औषधि केंद्र, जल कर केंद्र और एग्री ड्रोन संचालन जैसी आधुनिक पहलें भी सफलतापूर्वक शुरू की गई हैं। इससे किसानों को दवाई, सिंचाई, कृषि निगरानी और तकनीकी साधनों तक आसान पहुंच मिली है।
मध्यप्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में CPPP मॉडल के तहत 19 महत्वपूर्ण MoUs का निष्पादन किया गया, जो सहकारिता आधारित निवेश और ग्रामीण रोजगार के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।
सहकारिता विभाग की एक प्रमुख उपलब्धि विस्थापितों के पुनर्वास से भी जुड़ी है। कंपनियों के सहयोग से 10,000 से अधिक विस्थापित लोगों की 350 सहकारी समितियाँ गठित की गईं। इन समितियों के माध्यम से विस्थापित परिवारों को सुरक्षा गार्ड, माली और श्रमिक जैसे स्थायी रोजगार उपलब्ध कराए गए, जिससे उनका जीवन स्तर सुधारने में मदद मिली।
सरकार का कहना है कि सहकारिता से समृद्धि का यह मॉडल आगे भी जारी रहेगा। वर्ष 2026 को ‘कृषि एवं किसान वर्ष’ घोषित करना इसी दिशा में एक और बड़ा कदम है, जिसका उद्देश्य किसानों, ग्रामीण युवाओं और सहकारी संस्थाओं को नई ऊर्जा और अवसर प्रदान करना है।
