26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म की भूख हड़ताल, शिक्षा सुधार और पेपर लीक मुद्दे पर सरकार से बनी सहमति

सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के समर्थक सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चली अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। लंबे समय से जारी इस आंदोलन का समापन गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में हुआ, जहां केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने अपना अनशन खत्म किया। इस दौरान उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो, लेह-लद्दाख के शीर्ष निकाय के वरिष्ठ प्रतिनिधि और अन्य सहयोगी भी अस्पताल में मौजूद रहे। लंबे समय तक चले इस आंदोलन के समाप्त होने के बाद अब सभी की नजरें शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
सोनम वांगचुक ने पिछले महीने 28 तारीख से भूख हड़ताल शुरू की थी। उनका मुख्य उद्देश्य देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग उठाना और परीक्षा पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों में जवाबदेही तय करना था। उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं का सबसे बड़ा नुकसान मेहनत करने वाले छात्रों को उठाना पड़ता है। इसलिए ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई और प्रभावी व्यवस्था बनाना समय की जरूरत है।
अनशन के दौरान देशभर से उन्हें व्यापक समर्थन मिला। कई सामाजिक संगठनों, छात्रों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने उनके अभियान के प्रति अपनी एकजुटता जताई। इस बीच विभिन्न राजनीतिक दलों के कुल 65 सांसदों ने भी उनसे मुलाकात की या उन्हें पत्र लिखकर स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया। लगातार चल रही बातचीत और कई दौर की चर्चाओं के बाद आखिरकार उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला लिया।
भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने कहा कि यह निर्णय विभिन्न पक्षों के बीच हुई लंबी बातचीत और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बनी सहमति के बाद लिया गया है। उन्होंने सभी समर्थकों से अपील की कि आंदोलन के दौरान और आगे भी किसी भी प्रकार की हिंसा से पूरी तरह दूर रहें। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना ही सबसे प्रभावी रास्ता है और समाज में शांति बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आशा जताई कि डॉक्टरों की सलाह का पालन करते हुए वे जल्द स्वस्थ होंगे और अपना सामान्य वजन वापस प्राप्त करेंगे। प्रधानमंत्री ने उनके अच्छे स्वास्थ्य और शीघ्र पूर्ण स्वस्थ होने की कामना भी की।
सोनम वांगचुक लंबे समय से शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। इस बार उनका आंदोलन विशेष रूप से शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली में सुधार पर केंद्रित रहा। हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है, जिसके कारण इस मुद्दे पर देशभर में गंभीर बहस छिड़ी हुई है।
26 दिनों तक चले इस अनशन के समाप्त होने के साथ ही आंदोलन का एक महत्वपूर्ण चरण जरूर पूरा हुआ है, लेकिन शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग अभी भी चर्चा के केंद्र में बनी हुई है। आने वाले समय में इस विषय पर सरकार और संबंधित पक्षों की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर छात्रों, अभिभावकों और पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी।
