6 करोड़ लखपति दीदी बनाने की तैयारी तेज, महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए बनी नई राष्ट्रीय रणनीति

ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में देशभर में चलाए जा रहे लखपति दीदी अभियान को अब और व्यापक रूप देने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी उद्देश्य से कृषि, गैर-कृषि आजीविका और डिजिटल प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) पर केंद्रित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर आगामी वर्षों की रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य 6 करोड़ लखपति दीदी के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक प्रभावी रोडमैप तैयार करना था। इस दौरान विशेषज्ञों, अधिकारियों और विभिन्न राज्यों के ग्रामीण आजीविका मिशनों के प्रतिनिधियों ने महिलाओं की आय बढ़ाने, रोजगार के नए अवसर विकसित करने और आजीविका के टिकाऊ मॉडल तैयार करने पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि ग्रामीण महिलाओं को केवल स्वरोजगार तक सीमित न रखकर उन्हें उद्यमी के रूप में विकसित किया जाए, ताकि वे अपने परिवार और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती प्रदान कर सकें।
दो दिनों तक चली चर्चाओं में कृषि आधारित व्यवसायों के साथ-साथ गैर-कृषि क्षेत्रों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर फोकस किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि मूल्य संवर्धन, बाजार से सीधा जुड़ाव, डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग और आधुनिक तकनीकों को अपनाने से महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। इसके साथ ही जलवायु अनुकूल आजीविका मॉडल विकसित करने और विभिन्न सरकारी योजनाओं के बेहतर अभिसरण पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान डिजिटल एमआईएस प्रणाली को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा आधारित निर्णय प्रणाली, रीयल टाइम मॉनिटरिंग और राज्यों के बीच बेहतर डेटा एकीकरण से योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिक पारदर्शिता और प्रभावशीलता लाई जा सकती है। डिजिटल डैशबोर्ड और मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से महिलाओं की प्रगति को लगातार ट्रैक करने और आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की योजना पर भी सहमति बनी।
वक्ताओं ने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों ने पिछले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी अनुभव के आधार पर अब अगले चरण में उद्यम विविधीकरण, बाजार संपर्क, वित्तीय समावेशन और नवाचार को प्राथमिकता दी जाएगी। महिलाओं को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराने के लिए विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी विकसित किए जाएंगे।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण विकास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पुस्तक का विमोचन किया गया और राज्यों के बीच ज्ञान साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए समझौता भी किया गया। इससे सफल मॉडलों और अनुभवों का आदान-प्रदान आसान होगा तथा विभिन्न राज्यों को एक-दूसरे से सीखने का अवसर मिलेगा।
समापन सत्र में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने अगले पांच वर्षों के लिए साझा कार्ययोजना पर सहमति जताई। सभी ने यह संकल्प दोहराया कि महिलाओं की आय बढ़ाने, डिजिटल नवाचार को बढ़ावा देने और सामुदायिक संस्थाओं को मजबूत बनाकर 6 करोड़ लखपति दीदी के राष्ट्रीय लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। यह पहल ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण और आर्थिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
