भारत में नहीं दिखेगा नजारा; जानें ग्रहण का समय और सूतक काल

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28 अगस्त 2026 को साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना रक्षाबंधन के दिन होने के कारण लोगों के बीच खास चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि भारत में रहने वाले लोगों के लिए राहत की बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण देश में दिखाई नहीं देगा। ग्रहण की दृश्यता भारत में नहीं होने के कारण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाएगा।

यह चंद्र ग्रहण एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। इस दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा के बड़े हिस्से पर पड़ेगी। खगोलीय गणना के अनुसार ग्रहण के दौरान चंद्रमा का करीब 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया यानी अंब्रा में पहुंच सकता है। इसी वजह से यह आंशिक होने के बावजूद काफी प्रभावशाली खगोलीय घटना नजर आएगा। कई इलाकों में ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल या तांबे जैसी रंगत में दिखाई दे सकता है, जिसे आम तौर पर ब्लड मून जैसा दृश्य कहा जाता है।

28 अगस्त को होने वाले इस चंद्र ग्रहण का आंशिक चरण भारतीय समय के अनुसार सुबह करीब 8 बजकर 4 मिनट पर शुरू होने और लगभग 11 बजकर 21 मिनट तक चलने की जानकारी सामने आई है। हालांकि इस दौरान भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा, इसलिए देश के किसी हिस्से से ग्रहण को सीधे आसमान में देख पाना संभव नहीं होगा।

भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने का सीधा कारण यह है कि जिस समय चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ेगी, उस समय भारत में दिन का समय होगा और चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देगा। वहीं दुनिया के कई अन्य हिस्सों में लोग इस दुर्लभ खगोलीय घटना का सीधा नजारा देख सकेंगे। उत्तर और दक्षिण अमेरिका के साथ यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों में चंद्र ग्रहण दिखाई देने की संभावना है।

चंद्र ग्रहण के साथ सबसे ज्यादा चर्चा सूतक काल को लेकर होती है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में आमतौर पर चंद्र ग्रहण से करीब नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू माना जाता है। इस अवधि में कई धार्मिक और शुभ कार्यों को लेकर विशेष नियमों का पालन किया जाता है। हालांकि जब ग्रहण किसी स्थान से दिखाई नहीं देता है, तो वहां पारंपरिक रूप से सूतक काल को मान्य नहीं माना जाता। इसी वजह से भारत में 28 अगस्त के इस चंद्र ग्रहण का सूतक लागू नहीं होने की बात कही जा रही है।

इसका मतलब यह है कि भारत में रक्षाबंधन के त्योहार पर चंद्र ग्रहण की वजह से सामान्य धार्मिक गतिविधियों पर कोई विशेष रोक नहीं होगी। बहनें अपने भाइयों को राखी बांध सकती हैं और त्योहार के पारंपरिक कार्यक्रम सामान्य रूप से किए जा सकते हैं। हालांकि धार्मिक मान्यताओं का पालन करने वाले परिवार अपनी स्थानीय परंपरा और पंचांग के अनुसार निर्णय ले सकते हैं।

खगोल विज्ञान में चंद्र ग्रहण एक सामान्य प्राकृतिक घटना है। यह तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। 28 अगस्त का ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं बल्कि गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। इसके बावजूद चंद्रमा का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में आने के कारण यह दुनिया के कई हिस्सों के लिए बेहद आकर्षक खगोलीय दृश्य साबित हो सकता है।

भारत में यह ग्रहण सीधे दिखाई नहीं देगा, लेकिन खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोग दूसरे देशों से होने वाली लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए इस घटना को देख सकते हैं। इस तरह 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में भले ही आसमान में दिखाई न दे, लेकिन यह साल की महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाओं में से एक जरूर रहने वाला है।

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