पीएम मोदी को उज्बेकिस्तान सम्मान मिलने पर ओवैसी का तंज, बाबर और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर भी साधा निशाना

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान में मिले सम्मान को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने अपने बयान में बाबर, फरगना घाटी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया विचारों का जिक्र करते हुए कई सवाल उठाए। ओवैसी की यह टिप्पणी अब राजनीतिक बहस का नया विषय बन गई है।
ओवैसी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले सम्मान के लिए भारतीय जनता पार्टी को बधाई देते हैं, लेकिन इसके साथ उन्होंने तंज कसते हुए बाबर का संदर्भ भी जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि जिस देश से बाबर भारत आया था, उसी देश ने अब भारत के प्रधानमंत्री को सम्मानित किया है। ओवैसी ने फरगना घाटी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह उज्बेकिस्तान में स्थित है और बाबर का संबंध भी इसी क्षेत्र से माना जाता है।
अपने बयान में ओवैसी ने कहा कि हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी जहां भी विदेश यात्रा पर जाते हैं, वहां उन्हें किसी न किसी सम्मान या पुरस्कार से नवाजा जाता है। उन्होंने इसे लेकर व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि प्रधानमंत्री एक और सम्मान लेकर लौट रहे हैं और इसके लिए उन्हें बधाई दी जानी चाहिए।
ओवैसी ने इसके बाद भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा और संघ परिवार के नेताओं ने लंबे समय तक बाबर के नाम पर राजनीतिक बयान दिए हैं और उसे लेकर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अब जब बाबर की जन्मस्थली माने जाने वाले देश ने प्रधानमंत्री मोदी को सम्मान दिया है, तो संघ परिवार को इस पर विचार करना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब आरएसएस समर्थक बाबर को लेकर पहले जैसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करेंगे।
राजनीतिक बयानबाजी यहीं नहीं रुकी। ओवैसी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया भाषण की भी आलोचना की। मोहन भागवत ने विदेश में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि सभी इंसान समान हैं और अलग-अलग धार्मिक परंपराएं अंततः एक ही लक्ष्य की ओर ले जाती हैं। उन्होंने मानवता की एकता और विभिन्न धर्मों के बीच समान मूल्यों पर जोर दिया था।
ओवैसी ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आरएसएस की पुरानी रणनीति का हिस्सा है। उनके अनुसार संगठन की सार्वजनिक सभाओं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिए जाने वाले भाषणों और संगठन के भीतर कही जाने वाली बातों में अंतर दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस अपने पुराने विचारों से कभी पीछे नहीं हटता और न ही उन्हें वापस लेने की कोशिश करता है।
ओवैसी ने कहा कि बाहरी दुनिया के सामने उदार और समावेशी संदेश देना और संगठन के भीतर अलग तरह की बातें करना आरएसएस की कार्यशैली रही है। उन्होंने दावा किया कि यह दोहरी रणनीति लंबे समय से अपनाई जाती रही है और मोहन भागवत का हालिया बयान भी उसी का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं और उन्हें मिलने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों को लेकर विपक्षी दल समय-समय पर अपनी प्रतिक्रिया देते रहे हैं। वहीं भाजपा का कहना रहा है कि ऐसे सम्मान भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की मजबूत भूमिका का प्रतीक हैं। इस मुद्दे पर सियासी दल अपने-अपने नजरिए से बयान दे रहे हैं।
उज्बेकिस्तान के साथ भारत के संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी बढ़ी है। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा और उन्हें मिला सम्मान भी इसी बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
ओवैसी के बयान के बाद बाबर, आरएसएस और मोहन भागवत की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। एक ओर भाजपा इस सम्मान को भारत की कूटनीतिक सफलता बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लेकर अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया दर्ज करा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।
