भारत का पांचवां राहत विमान नेपाल रवाना, 68 टन से ज्यादा राहत सामग्री पहुंची, मृतकों का आंकड़ा 1000 के पार

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार तेज किया जा रहा है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच भारत ने एक बार फिर मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाते हुए नेपाल के लिए अपना पांचवां राहत विमान रवाना किया है। तिब्बत में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद आई इस विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के कई जिलों में भारी तबाही मचाई है। हजारों लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि मृतकों और लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे मुश्किल समय में भारत राहत सामग्री, दवाइयों और विशेषज्ञ बचाव दल के माध्यम से नेपाल की हरसंभव मदद कर रहा है।
भारत की ओर से भेजे गए पांचवें राहत विमान में 11 सदस्यीय विशेष बचाव दल, आधुनिक बचाव उपकरण और 5.5 टन आवश्यक दवाइयां भेजी गई हैं। इस सहायता का उद्देश्य बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों को तेज करना और घायल एवं प्रभावित लोगों तक जरूरी चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना है। राहत दल को ऐसे उपकरणों से लैस किया गया है, जिनका उपयोग कठिन और जलमग्न इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान के दौरान किया जाएगा।
नेपाल में आई इस आपदा के बाद भारत अब तक 68 टन से अधिक राहत सामग्री भेज चुका है। राहत सामग्री में कंबल, स्लीपिंग बैग, मजबूत तिरपाल, प्लास्टिक शीट, हाइजीन किट, खाद्य पैकेट, सोलर लैंप, पोर्टेबल जनरेटर, पानी शुद्ध करने की गोलियां और कई जरूरी दवाइयां शामिल हैं। इन सामानों को प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविरों और बचाव एजेंसियों के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। भारत की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि आपदा प्रभावित लोगों को भोजन, दवा और अस्थायी आश्रय जैसी आवश्यक सुविधाएं समय पर मिल सकें।
नेपाल में बाढ़ की स्थिति अब भी बेहद गंभीर बनी हुई है। लगातार नदियों के किनारे शव मिलने के कारण मृतकों की संख्या बढ़कर 1000 के पार पहुंच गई है। अब तक 1003 शव बरामद किए जा चुके हैं। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में चितवन और नवलपरासी पूर्व शामिल हैं, जहां बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। राहत एजेंसियां मलबे और नदी किनारे लगातार खोज अभियान चला रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
बाढ़ के कारण हजारों लोग अब भी लापता हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार 4,606 लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इनमें 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। तेज बहाव, भूस्खलन और कई इलाकों का संपर्क टूट जाने से खोज अभियान काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। कई गांव अब भी पूरी तरह प्रभावित हैं और राहत टीमें लगातार वहां तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
नेपाल सरकार ने रसुवा और नुवाकोट जिलों में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र की जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे लोगों की तलाश के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। इन परियोजनाओं की सुरंगों में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। बचाव अभियान को तकनीकी सहायता देने के लिए भारत और चीन ने विशेषज्ञों की टीमें भेजी हैं, जो सुरंगों और कठिन इलाकों में आधुनिक उपकरणों की मदद से खोज कार्य कर रही हैं।
राहत अभियान के साथ-साथ मृतकों की पहचान का काम भी तेजी से चल रहा है। भारत की 19 सदस्यीय फोरेंसिक विशेषज्ञ टीम नेपाल पहुंचकर स्थानीय विशेषज्ञों के साथ डीएनए नमूनों की जांच कर रही है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करना है, ताकि उनके परिवारों को सही जानकारी मिल सके और आवश्यक कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जा सके।
नेपाल के कई हिस्सों में सड़कें, पुल और बिजली व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हवाई और जमीनी दोनों माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत की ओर से लगातार भेजी जा रही सहायता इस बड़े मानवीय संकट में राहत कार्यों को मजबूती देने का प्रयास है। बचाव दल, चिकित्सा सहायता और राहत सामग्री के जरिए प्रभावित लोगों तक तेजी से मदद पहुंचाई जा रही है, जबकि खोज अभियान अभी भी पूरी क्षमता के साथ जारी है। नेपाल में हालात सामान्य होने तक राहत और बचाव कार्यों को लगातार आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
