नेपाल बाढ़ में भारत का राहत अभियान तेज, 166 भारतीय नागरिक सुरक्षित निकाले गए, मेडिकल सहायता की पांचवीं खेप पहुंची

नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद भारत का राहत और बचाव अभियान लगातार तेज गति से जारी है। प्रभावित इलाकों में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ चिकित्सा सहायता, आधुनिक बचाव उपकरण और विशेषज्ञ टीमों को भी नेपाल भेजा जा रहा है। इस मानवीय अभियान के तहत अब तक 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि राहत सामग्री की पांचवीं खेप भी नेपाल पहुंच गई है।
अब तक 166 भारतीय नागरिक सुरक्षित निकाले गए
विदेश मंत्रालय के अनुसार राहत अभियान के दौरान बुधवार को तीन और भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया गया। इसके साथ ही नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकाले गए भारतीय नागरिकों की कुल संख्या 166 हो गई है। भारतीय दूतावास और बचाव एजेंसियां स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर लगातार राहत कार्यों में जुटी हुई हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों की सुरक्षित वापसी
तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में कैलाश मानसरोवर यात्रा और अन्य गतिविधियों के लिए गए भारतीय नागरिकों की वापसी भी शुरू हो गई है। बुधवार को 410 भारतीय नागरिक चीन से रवाना हुए। इन यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए संबंधित एजेंसियां लगातार समन्वय कर रही हैं।
भारत ने भेजी मेडिकल सहायता की पांचवीं खेप
भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री की पांचवीं खेप भेजते हुए मानवीय सहयोग को और मजबूत किया है। भारतीय वायुसेना का विशेष विमान काठमांडू पहुंचा, जिसमें करीब 5.5 टन चिकित्सा सामग्री भेजी गई। इस खेप में एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाएं, सर्जिकल उपकरण और अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री शामिल है, ताकि बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल स्वास्थ्य सहायता मिल सके।
विशेष बचाव दल और आधुनिक उपकरण भी पहुंचे
मेडिकल सहायता के साथ भारत ने 11 सदस्यीय विशेष बचाव दल को भी नेपाल भेजा है। इसके अलावा छह टन से अधिक आधुनिक रेस्क्यू उपकरण भी राहत अभियान के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। अब तक भारत नेपाल को लगभग 74 टन राहत सामग्री उपलब्ध करा चुका है, जिसमें चिकित्सा सामग्री, राहत उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधन शामिल हैं।
त्रिशूली से स्याब्रुबेसी तक पहुंचा बचाव अभियान
भारतीय सुरंग बचाव दल ने अपने अभियान का बेस त्रिशूली से स्याब्रुबेसी स्थानांतरित कर दिया है, जिससे चिलीमे सुरंग तक पहुंचने में कम समय लगेगा। नेपाली सेना के साथ संयुक्त अभियान के दौरान बचाव दल ने कीचड़ और मलबे से भरी सुरंग में लगभग 100 मीटर तक आगे बढ़ने में सफलता हासिल की है। राहत एजेंसियां भारी मशीनरी को सुरंग तक पहुंचाने के लिए अस्थायी सड़क बनाने की संभावनाओं पर भी काम कर रही हैं।
डीएनए जांच में भी भारत कर रहा सहयोग
भारत से पहुंचे फॉरेंसिक विशेषज्ञ काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में नेपाली विशेषज्ञों के साथ मिलकर डीएनए नमूनों की जांच और शवों की पहचान का कार्य कर रहे हैं। इस सहयोग का उद्देश्य लापता लोगों की पहचान की प्रक्रिया को तेज करना और प्रभावित परिवारों को जल्द जानकारी उपलब्ध कराना है।
नेपाल में तबाही का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा
नेपाल की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार बाढ़ में अब तक 1,114 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 3,916 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन भारी मलबे और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई इलाकों तक पहुंचना अब भी चुनौती बना हुआ है।
हिमालयी जलवायु संकट पर नेपाल की चिंता
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने संसद में कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गंभीरता से लेना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार नेपाल-चीन सीमा के पास लेंगदे खोला क्षेत्र में हिमस्खलन से प्राकृतिक बांध बन गया था, जो बाद में टूट गया। इसके बाद भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ त्रिशूली नदी तक पहुंची और बड़े पैमाने पर तबाही का कारण बनी।
