फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया फ्लाइट में 36 हजार फीट पर मचा हड़कंप

फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-2379 से जुड़ी 4 अगस्त की घटना को लेकर जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। शुरुआती जांच में उड़ान के दौरान विमान में गंभीर तकनीकी खराबी और उड़ान पूरी होने के बाद पायलट की मेडिकल जांच से जुड़ी जानकारी सामने आई है। हालांकि दोनों घटनाओं के बीच किसी तरह का संबंध अभी तक स्थापित नहीं किया गया है और जांच जारी है।
विमान में कुल 145 लोग थे सवार
यह उड़ान एयरबस A320-251N विमान से संचालित की जा रही थी, जिसका निर्माण वर्ष 2018 में हुआ था। विमान में कुल 145 लोग मौजूद थे। इनमें 137 यात्री, तीन शिशु, छह केबिन क्रू और दो पायलट शामिल थे।
फ्लाइट के कमांडर के पास लगभग 5,055 घंटे का उड़ान अनुभव था, जबकि सह-पायलट करीब 1,393 घंटे उड़ान भर चुके थे। दोनों पायलटों ने उड़ान से पहले पर्याप्त आराम किया था और पिछले 24 घंटे में किसी अन्य उड़ान का संचालन नहीं किया था।
शुरुआत में सामान्य रही उड़ान
4 अगस्त की सुबह विमान ने फुकेत से दिल्ली के लिए उड़ान भरी। शुरुआती चरण में उड़ान पूरी तरह सामान्य रही और किसी तकनीकी समस्या की जानकारी दर्ज नहीं हुई। उड़ान निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ती रही और भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क किया गया।
इसके बाद विमान को 34 हजार फीट से बढ़ाकर 36 हजार फीट की ऊंचाई पर जाने की अनुमति दी गई। क्रू ने निर्देश के अनुसार विमान को नई ऊंचाई तक पहुंचाया। लेकिन कुछ ही देर बाद हालात अचानक बदल गए।
36 हजार फीट पर एक के बाद एक फेल हुए तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम
जांच के अनुसार, 36 हजार फीट की ऊंचाई पर विमान के तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम क्रमवार फेल होने लगे। यह किसी भी विमान के लिए बेहद गंभीर तकनीकी स्थिति मानी जाती है, क्योंकि हाइड्रॉलिक सिस्टम विमान के कई महत्वपूर्ण नियंत्रणों को संचालित करता है।
हाइड्रॉलिक सिस्टम फेल होने के साथ ही ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हो गया। इसके तुरंत बाद कॉकपिट में स्टॉल वॉर्निंग सक्रिय हो गई। कुछ ही सेकंड के भीतर विमान अपनी निर्धारित ऊंचाई से तेजी से ऊपर और नीचे जाने लगा।
महज 9 सेकंड में यात्रियों के बीच मच गई अफरा-तफरी
जांच में सामने आया कि करीब 9 सेकंड तक विमान ने तेज झटके झेले। इस दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक बदलाव हुआ, जिससे केबिन के अंदर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
अचानक आए झटकों के कारण कई यात्री अपनी सीटों से उछल गए। घटना में 20 यात्री और चार केबिन क्रू घायल हो गए। कुल 24 लोगों को चोटें आईं। इसके बावजूद पायलटों ने स्थिति को संभालते हुए विमान को सुरक्षित तरीके से दिल्ली पहुंचाया।
दिल्ली पहुंचने के बाद पायलट का टेस्ट भी चर्चा में
विमान के सुरक्षित उतरने के बाद फ्लाइट कमांडर की साइको-एक्टिव पदार्थों की जांच की गई। शुरुआती जांच का परिणाम नॉन-निगेटिव आया। इसके बाद पुष्टि के लिए ब्लड टेस्ट कराया गया, जिसमें भी यही परिणाम दर्ज किया गया।
हालांकि जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक जांच का हिस्सा है। इस मेडिकल रिपोर्ट और उड़ान के दौरान आई तकनीकी खराबी के बीच फिलहाल कोई संबंध नहीं जोड़ा गया है।
जांच अभी जारी, अंतिम रिपोर्ट का इंतजार
यह घटना विमान सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शुरुआती रिपोर्ट में तकनीकी घटनाक्रम और मेडिकल जांच के तथ्य दर्ज किए गए हैं, लेकिन दुर्घटना या तकनीकी खराबी के कारणों पर अंतिम निष्कर्ष अभी नहीं निकाला गया है।
जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट में यह स्पष्ट होगा कि 36 हजार फीट की ऊंचाई पर तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम क्यों फेल हुए, ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट होने की असली वजह क्या थी और पूरे घटनाक्रम में किन तकनीकी या मानवीय पहलुओं की भूमिका रही।
