पीएम मोदी की शिक्षकों से खास अपील, छात्रों को नशे और बढ़ते स्क्रीन टाइम से बचाने पर दिया जोर

शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशभर के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों से संवाद करते हुए छात्रों के भविष्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे केवल पढ़ाई तक सीमित न रहें, बल्कि बच्चों के जीवन, व्यवहार और आदतों पर भी ध्यान दें। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के समय में शिक्षकों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है, क्योंकि बदलते सामाजिक माहौल में बच्चों को सही दिशा देने में उनकी भूमिका बेहद अहम हो गई है।
छात्रों को नशे की बुराई से दूर रखने की अपील
प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान छात्रों में बढ़ती नशे की समस्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बड़े शहरों और विश्वविद्यालयों में कई बार यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कोई छात्र नशे की चपेट में है या नहीं। ऐसे मामलों में यह पहचानना भी आसान नहीं होता कि कौन किसे नशीले पदार्थों की ओर धकेल रहा है।
उन्होंने शिक्षकों से कहा कि यदि किसी छात्र के व्यवहार, स्वभाव या दिनचर्या में अचानक बदलाव दिखाई दे तो उसे गंभीरता से लें। समय रहते ऐसे संकेतों को पहचानना और बच्चों से संवाद करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही इस समस्या से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है।
स्क्रीन टाइम कम करने पर भी दिया विशेष जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों में लगातार बढ़ रहे स्क्रीन टाइम को भी चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन, टैबलेट और अन्य डिजिटल उपकरणों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर असर डाल सकता है।
उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे छात्रों को खेल, कला, संगीत, पढ़ने की आदत और अन्य रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करें। इससे बच्चों का स्क्रीन पर बिताया जाने वाला समय कम होगा और उनका समग्र विकास बेहतर तरीके से हो सकेगा।
शिक्षकों की भूमिका अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण
प्रधानमंत्री ने कहा कि संयुक्त परिवारों की संख्या लगातार कम हो रही है। पहले बच्चों को परिवार के कई सदस्यों से मार्गदर्शन और संस्कार मिलते थे, लेकिन अब यह जिम्मेदारी काफी हद तक शिक्षकों पर भी आ गई है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं हैं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में भी उनकी अहम भूमिका होती है। स्कूल में बिताया गया समय बच्चों के जीवन को आकार देता है और शिक्षक उन्हें सही दिशा दिखाने वाले सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक बन सकते हैं।
केवल पढ़ाई नहीं, बच्चों के व्यवहार पर भी रखें नजर
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि छात्रों के परीक्षा परिणाम और अंक ही सब कुछ नहीं होते। बच्चों के व्यवहार, उनकी भावनाओं, दोस्ती, दिनचर्या और सामाजिक गतिविधियों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे किसी परेशानी से गुजर रहे होते हैं, लेकिन उसे शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते। ऐसे समय में शिक्षक यदि संवेदनशीलता के साथ बच्चों को समझें और उनसे खुलकर बात करें, तो कई समस्याओं का समाधान शुरुआती स्तर पर ही किया जा सकता है।
बचपन को जीवंत बनाए रखने का संदेश
संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी छात्र का बचपन खत्म नहीं होना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों के जीवन में जिज्ञासा, खेल, रचनात्मकता और सीखने का उत्साह बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि बचपन केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चों को सीखने के साथ-साथ जीवन का आनंद लेने का अवसर भी मिलना चाहिए। शिक्षक इस दिशा में सबसे बड़ा योगदान दे सकते हैं।
समाज को भी निभानी होगी जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों को स्वस्थ और सकारात्मक वातावरण देने की जिम्मेदारी केवल स्कूलों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। अभिभावक, शिक्षक और समाज मिलकर बच्चों को ऐसी गतिविधियों से जोड़ें, जो उन्हें आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनने में मदद करें।
उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे छात्रों को नशे से दूर रखने, स्क्रीन टाइम कम करने और रचनात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए लगातार प्रेरित करें। उनका मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि बेहतर इंसान तैयार करना भी है।
