उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का मेघालय दौरा विकसित भारत के विजन को लेकर बड़ा संदेश दिया।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को मेघालय की राजधानी शिलांग में आयोजित सार्वजनिक स्वागत समारोह में विकसित भारत के विजन को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब देश का हर राज्य, हर गांव और हर नागरिक विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा। उन्होंने समावेशी विकास पर जोर देते हुए कहा कि आधुनिक विकास के साथ मेघालय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक पर्यावरण और पारंपरिक पहचान का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अपने दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति ने राज्य को बड़ी विकास परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने 1,010.95 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच महत्वपूर्ण परियोजनाओं की आधारशिला रखी और 31.05 करोड़ रुपये की लागत से बने नोंगस्टोइन मातृ एवं बाल अस्पताल का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से राज्य में जल आपूर्ति, सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवाओं और बिजली ढांचे को नई मजबूती मिलेगी।
मेघालय की जनता के विकास में साथ देने का भरोसा
शिलांग के सोसो थाम सभागार में आयोजित समारोह में उपराष्ट्रपति का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। उन्होंने मेघालय सरकार और राज्य की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य की प्रगति और विकास यात्रा में केंद्र सरकार हर संभव सहयोग देती रहेगी।
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत देश के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है और मेघालय अपनी सांस्कृतिक विविधता तथा प्राकृतिक संपदा के कारण विशेष पहचान रखता है।
विकसित भारत के लिए समावेशी विकास पर जोर
उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल बड़े शहरों के विकास से पूरा नहीं होगा। इसके लिए गांवों तक सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए जिसमें समाज का कोई भी वर्ग पीछे न छूटे। आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समानता और पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
मेघालय की संस्कृति और पर्यावरण की सराहना
सीपी राधाकृष्णन ने मेघालय की मातृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था, जनजातीय परंपराओं और प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य के जीवित जड़ों वाले पुल, सोहरा और मावसिनराम जैसे प्राकृतिक स्थल पूरी दुनिया के लिए प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने का संदेश देते हैं।
उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं और मेघालय इसका बेहतरीन उदाहरण है।
पी.ए. संगमा को किया याद
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता स्वर्गीय पी.ए. संगमा को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उन्हें एक महान सांसद, प्रभावशाली वक्ता और लोकतांत्रिक मूल्यों के मजबूत समर्थक के रूप में याद किया।
उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
पूर्वोत्तर में सड़क और कनेक्टिविटी को मिली नई गति
कनेक्टिविटी को विकास की रीढ़ बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले दशक में पूर्वोत्तर राज्यों में ग्रामीण सड़क नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र में लगभग 47 हजार करोड़ रुपये खर्च कर 46 हजार किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया है। इससे दूर-दराज के गांवों का संपर्क कस्बों और शहरों से मजबूत हुआ है।
1,010 करोड़ रुपये की पांच बड़ी परियोजनाओं की आधारशिला
उपराष्ट्रपति ने जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखी, उनमें कई महत्वपूर्ण विकास योजनाएं शामिल हैं।
- नई शिलांग जल आपूर्ति योजना चरण-2।
- NESIDS के तहत दो सड़क संपर्क परियोजनाएं।
- शिलांग सिविल अस्पताल में 30 बिस्तरों वाला आयुष केंद्र।
- PM-DevINE योजना के तहत मावखानू में 132/33 केवी सबस्टेशन।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से राज्य में बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा।
नोंगस्टोइन में मातृ एवं बाल अस्पताल का उद्घाटन
उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत तैयार नोंगस्टोइन स्थित मातृ एवं बाल अस्पताल का उद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा कि यह अस्पताल विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि स्वास्थ्य ढांचे के मजबूत होने से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।
जल जीवन मिशन और पर्यटन पहलों की सराहना
सीपी राधाकृष्णन ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत मेघालय सरकार की पहल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पेयजल और बेहतर जल प्रबंधन लोगों के जीवन स्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने राज्य सरकार की होमस्टे योजना, सीएम-एलिवेट और ग्रीन मेघालय जैसी पहलों की भी सराहना करते हुए कहा कि ये योजनाएं पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने में मददगार साबित हो रही हैं।
धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक सद्भाव का दिया संदेश
उपराष्ट्रपति ने कहा कि सच्ची धर्मनिरपेक्षता का अर्थ सभी विचारों, मान्यताओं और परंपराओं का सम्मान करना है। उन्होंने लोगों से आपसी सद्भाव, भाईचारे और सम्मान के साथ आगे बढ़ने की अपील की।
उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता है और यही विविधता विकसित भारत की नींव बनेगी।
2047 तक विकसित भारत का संकल्प दोहराया
अपने संबोधन के अंत में सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य पूरे देश का साझा संकल्प है। उन्होंने कहा कि जब हर राज्य विकास करेगा, हर गांव आत्मनिर्भर बनेगा और हर नागरिक को अवसर मिलेगा, तभी भारत दुनिया के अग्रणी देशों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।
