नेपाल बाढ़ 2026: तबाही के बाद भारत और चीन से मांगे अस्थायी बेली ब्रिज,

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नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। बाढ़ और भूस्खलन से देश के कई महत्वपूर्ण सड़क मार्ग और पुल पूरी तरह तबाह हो गए हैं, जिससे कई इलाके बाहरी दुनिया से कट गए हैं। ऐसे में नेपाल सरकार युद्धस्तर पर सड़क संपर्क बहाल करने में जुटी है और अलग-थलग पड़े समुदायों तक राहत पहुंचाने के लिए भारत और चीन से अस्थायी बेली ब्रिज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

26 अगस्त को आई इस भीषण प्राकृतिक आपदा ने नेपाल में भारी तबाही मचाई। अब तक 1,356 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,994 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और अब तक 13,396 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। हालांकि, कई दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

बाढ़ की शुरुआत नेपाल-तिब्बत सीमा के पास चट्टानों के खिसकने और हिमस्खलन के बाद हुई, जिससे भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का तेज बहाव आ गया। इस उफान ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों में मकानों, वाहनों, सड़कों और पुलों को बहा दिया। इसके अलावा कई पनबिजली परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे बुनियादी ढांचे पर बड़ा असर पड़ा है।

आपदा के बाद नेपाल सरकार ने सड़क संपर्क बहाल करने के लिए भारत और चीन दोनों से अस्थायी इस्पात पुल यानी बेली ब्रिज की मांग की है। दोनों पड़ोसी देशों ने इस अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। चीन की ओर से नेपाल के मुस्तांग जिले में कोरला सीमा चौकी पर 100-100 मीटर लंबे दो बेली ब्रिज भेजे जा चुके हैं। वहीं भारत ने भी नेपाल को जरूरत के मुताबिक बेली ब्रिज उपलब्ध कराने की पेशकश की है।

सरकारी आकलन के मुताबिक बाढ़ से सड़कों और पुलों को करीब 30 अरब नेपाली रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं इनका पुनर्निर्माण करने में लगभग 50 अरब नेपाली रुपये खर्च होने का अनुमान है। सबसे अधिक नुकसान रसुवा और चितवन के बीच सड़क नेटवर्क को हुआ, जहां 41 पुल पूरी तरह नष्ट हो गए और चार अन्य पुल आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। इस मार्ग पर कुल 63 पुल थे, जिनमें से केवल 18 पुल ही सुरक्षित बचे हैं।

बाढ़ की वजह से रसुवा जिले का नुवाकोट से सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है। वहीं फुरके खोला पर बना कंक्रीट का पुल बह जाने से धादिंग जिले के मुख्यालय धादिंगबेसी और पृथ्वी राजमार्ग के बीच सीधा संपर्क भी समाप्त हो गया। इससे राहत सामग्री और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

सड़क विभाग ने क्षतिग्रस्त सड़कों से मलबा हटाने और अस्थायी पुल लगाने का काम शुरू कर दिया है। कई स्थानों पर नेपाली सेना भी मॉड्यूलर एक्रो ब्रिज स्थापित करने में जुटी हुई है ताकि लोगों की आवाजाही जल्द से जल्द बहाल की जा सके।

हालांकि राहत कार्य आसान नहीं हैं। सड़क विभाग के पास 48 मीटर तक लंबे 11 बेली ब्रिज मौजूद हैं, लेकिन उन्हें प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि कई संपर्क सड़कें भी बाढ़ में बह चुकी हैं। भारी मशीनों और निर्माण सामग्री को दुर्गम क्षेत्रों तक ले जाने में काफी मुश्किलें आ रही हैं।

बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान के साथ शवों की पहचान का काम भी जारी है। तेज बहाव और मलबे के कारण कई शव क्षतिग्रस्त अवस्था में मिले हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। अब तक केवल 98 शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिजनों को सौंपा जा सका है।

नेपाल में बुनियादी ढांचे को हुए व्यापक नुकसान ने राहत कार्यों को और जटिल बना दिया है। सरकार की प्राथमिकता फिलहाल सड़क संपर्क बहाल करना, अस्थायी पुल स्थापित करना और प्रभावित समुदायों तक भोजन, दवाइयां तथा अन्य जरूरी सहायता पहुंचाना है ताकि सामान्य जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौट सके।

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