बिहार में गंगा, कोसी, पुनपुन समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य की कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों की चिंता बढ़ गई है। गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा जैसी नदियों का जलस्तर कई स्थानों पर सामान्य सीमा से काफी ऊपर दर्ज किया गया है। प्रशासन ने प्रभावित जिलों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है और लगातार जलस्तर पर नजर रखी जा रही है।
मंगलवार सुबह जारी ताजा जलस्तर रिपोर्ट के अनुसार, कई नदियों में पानी का स्तर खतरे के निशान से एक मीटर से लेकर लगभग तीन मीटर तक ऊपर पहुंच चुका है। कुछ स्थानों पर जलस्तर बढ़ रहा है, जबकि कुछ जगहों पर हल्की गिरावट भी दर्ज की गई है। इसके बावजूद बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है।
पुनपुन नदी की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है। श्रीपालपुर क्षेत्र में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 2.95 मीटर ऊपर दर्ज किया गया है। यहां लगातार पानी बढ़ने का रुझान बना हुआ है, जिससे आसपास के गांवों और खेतों में जलभराव की समस्या बढ़ गई है। प्रशासन ने इस क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
बूढ़ी गंडक नदी भी कई इलाकों में उफान पर है। खगड़िया में नदी खतरे के निशान से लगभग दो मीटर ऊपर बह रही है और जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा और गहरा गया है। स्थानीय प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने में जुटा हुआ है।
गंगा नदी का जलस्तर भी बिहार के कई प्रमुख घाटों पर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। पटना के दीघा घाट और गांधी घाट के अलावा हाथीदह में भी नदी सामान्य स्तर से ऊपर बह रही है। हालांकि इन स्थानों पर जलस्तर में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन निचले क्षेत्रों में अब भी पानी फैला हुआ है। दूसरी ओर मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव जैसे इलाकों में गंगा का जलस्तर बढ़ने का सिलसिला जारी है, जिससे नए क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
कोसी नदी भी बलतारा और कुरसेला में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। दोनों स्थानों पर जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। कोसी के बढ़ते पानी ने आसपास के गांवों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वहीं गंडक नदी डुमरिया घाट और हाजीपुर में भी खतरे के स्तर से ऊपर बनी हुई है। हालांकि कुछ स्थानों पर गंडक के जलस्तर में कमी का रुझान दिखाई दिया है।
बागमती नदी मुजफ्फरपुर में खतरे के निशान से ऊपर बनी हुई है, जबकि घाघरा नदी भी दरौली और गंगपुर सिसवन क्षेत्रों में चेतावनी स्तर से ऊपर बह रही है। इन सभी नदियों के बढ़े जलस्तर के कारण प्रशासन लगातार तटबंधों की निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी संभावित कटाव या टूटने की स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
राज्य के प्रमुख बैराजों से पानी का डिस्चार्ज फिलहाल कम होने लगा है, लेकिन नदियों में पहले से मौजूद भारी जलराशि के कारण बाढ़ का असर बना हुआ है। राहत एजेंसियां लगातार स्थिति का आकलन कर रही हैं और प्रभावित क्षेत्रों में नावों के जरिए लोगों तक भोजन, पेयजल और जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।
बाढ़ का असर अब 13 जिलों के 77 प्रखंडों और 438 ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुका है। करीब 29.13 लाख लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं। कई गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित शिविरों में पहुंचाया गया है। प्रशासन का कहना है कि राहत शिविरों में भोजन, दवा और पीने के पानी की व्यवस्था की जा रही है।
मौसम और नदियों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे जाने से बचने, सुरक्षित स्थानों पर रहने और सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। गंगा, कोसी, बूढ़ी गंडक और पुनपुन नदी के तटीय इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
