नेपाल बाढ़ त्रासदी गुजरात के 30 लापता लोगों की पहचान के लिए शुरू हुई डीएनए परिवारों से जुटाए गए नमूने

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता लोगों की तलाश और उनकी पहचान का अभियान लगातार तेज किया जा रहा है। इस भीषण आपदा में गुजरात के करीब 30 लोग अब भी लापता हैं या उनसे किसी तरह का संपर्क नहीं हो पाया है। इन लोगों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए गुजरात सरकार ने उनके परिजनों के डीएनए नमूने एकत्र करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य नेपाल में मिले शवों और मानव अवशेषों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करना है, ताकि परिवारों को अपने प्रियजनों के बारे में सही जानकारी मिल सके।
परिवारों के डीएनए सैंपल जुटाने का अभियान तेज
राज्य सरकार के अनुसार लापता लोगों में से अधिकांश परिवारों के करीबी रिश्तेदारों के डीएनए नमूने एकत्र किए जा चुके हैं। बाकी परिवारों से भी नमूने लेने की प्रक्रिया जारी है। इन सभी नमूनों की डीएनए प्रोफाइलिंग की जा रही है, जिससे नेपाल में मिले मानव अवशेषों का मिलान कर पहचान की जा सके।
छह शहरों की फोरेंसिक लैब में हो रही जांच
डीएनए जांच के लिए गुजरात की छह विशेष फोरेंसिक प्रयोगशालाओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। गांधीनगर, अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, जूनागढ़ और राजकोट स्थित लैब में आधुनिक तकनीक के जरिए डीएनए प्रोफाइलिंग की जा रही है। यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार निशुल्क संचालित की जा रही है।
नेपाल में चल रही पहचान प्रक्रिया से होगा मिलान
गांधीनगर स्थित नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी भारत में एकत्र किए गए डीएनए नमूनों की प्रोफाइलिंग कर रही है। इसके बाद इन रिपोर्टों का नेपाल में चल रही पहचान प्रक्रिया के साथ मिलान किया जाएगा। विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ टीम नेपाल में भी पहचान अभियान में सहयोग कर रही है ताकि प्रक्रिया तेजी से पूरी हो सके।
नेपाल पुलिस भी कर रही है डीएनए जांच
नेपाल पुलिस ने बाढ़ प्रभावित इलाकों से मिले शवों और मानव अवशेषों की डीएनए जांच शुरू कर दी है। भारत से भेजी जा रही डीएनए रिपोर्ट और नेपाल में उपलब्ध नमूनों का मिलान कर लापता लोगों की पहचान की जाएगी। इससे पहचान प्रक्रिया अधिक सटीक और तेज होने की उम्मीद है।
परिवारों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं अधिकारी
अधिकारियों की टीमें प्रत्येक लापता व्यक्ति के परिवार से लगातार संपर्क में हैं। उन्हें डीएनए नमूना देने की पूरी प्रक्रिया, निर्धारित प्रयोगशालाओं और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी जा रही है। साथ ही पहचान अभियान से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी भी परिवारों तक पहुंचाई जा रही है।
विदेशों में रहने वाले रिश्तेदारों के नमूने भी जुटाए जा रहे
कई लापता लोगों के करीबी रिश्तेदार न्यूजीलैंड, अमेरिका, कनाडा और कई अफ्रीकी देशों में रहते हैं। ऐसे मामलों में वहां की अधिकृत फोरेंसिक एजेंसियों के माध्यम से डीएनए नमूने लिए जा चुके हैं या लिए जा रहे हैं। संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय बनाकर पहचान प्रक्रिया की जानकारी साझा की जा रही है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े कई यात्री अब भी लापता
लापता लोगों में अहमदाबाद, आनंद, बनासकांठा, खेड़ा, गांधीनगर, सूरत, वलसाड, राजकोट और गुजरात के अन्य जिलों के निवासी शामिल हैं। इनमें कई लोग अलग-अलग ट्रैवल एजेंसियों के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल गए थे और बाढ़ आने के बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है।
नेपाल सरकार के साथ साझा की गई लापता लोगों की सूची
राज्य आपातकालीन अभियान केंद्र, जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियां मिलकर लापता लोगों की तलाश और पहचान के प्रयासों का समन्वय कर रही हैं। लापता और संपर्क से बाहर लोगों की संयुक्त सूची नेपाल सरकार के साथ साझा की गई है। अब उम्मीद है कि डीएनए प्रोफाइलिंग और वैज्ञानिक मिलान के जरिए परिवारों को जल्द अपने परिजनों की पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी।
