भारत-रूस विमान समझौता: भारत में बनेंगे यात्री विमान, 105 क्षेत्रीय टर्बोप्रॉप विमानों की संभावित सप्लाई पर बड़ी चर्चा

भारत और रूस के बीच विमानन क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों ने भारत में यात्री विमानों के संयुक्त निर्माण और भारतीय विमानन कंपनियों को 105 क्षेत्रीय टर्बोप्रॉप विमानों की संभावित आपूर्ति को लेकर विस्तृत चर्चा की है। यह पहल भारत में तेजी से बढ़ रही क्षेत्रीय हवाई संपर्क की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ देश को विमान निर्माण का बड़ा केंद्र बनाने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
भारत में संयुक्त रूप से बन सकते हैं यात्री विमान
नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भारत और रूस के प्रतिनिधिमंडलों ने नागरिक यात्री विमानों के संयुक्त निर्माण पर विचार-विमर्श किया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य भारत में विमान निर्माण की क्षमता विकसित करना और स्थानीय स्तर पर आधुनिक क्षेत्रीय विमानों का उत्पादन बढ़ाना रहा। इससे भविष्य में भारत की विमान निर्माण क्षमता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
105 क्षेत्रीय टर्बोप्रॉप विमानों की संभावित आपूर्ति
प्रस्तावित समझौतों के तहत भारतीय विमानन कंपनियों को 105 क्षेत्रीय टर्बोप्रॉप विमानों की संभावित आपूर्ति पर बातचीत हुई। इस योजना में पिनेकल एयर, एयर केरल और स्लीक एविएशन जैसी एयरलाइंस शामिल हैं। इन विमानों का उपयोग छोटे और मध्यम शहरों के बीच हवाई सेवाओं को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है।
क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
भारत में पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय हवाई यात्रा की मांग तेजी से बढ़ी है। सरकार भी छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने पर लगातार जोर दे रही है। ऐसे में नए टर्बोप्रॉप विमान कम दूरी के रूटों पर बेहतर संचालन, कम ईंधन खर्च और अधिक यात्रियों तक पहुंच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सुपरजेट एसजे-100 के संयुक्त निर्माण की तैयारी
सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन पहले ही सुपरजेट एसजे-100 यात्री विमान के लाइसेंस के तहत भारत में संयुक्त निर्माण और रखरखाव को लेकर प्रारंभिक समझौता कर चुकी हैं। अब इस समझौते को आगे बढ़ाने और उत्पादन प्रक्रिया को गति देने पर चर्चा की गई है।
रूस ने पेश किए अपने आधुनिक क्षेत्रीय विमान
नई दिल्ली में आयोजित इनोप्रोम इंडिया कार्यक्रम के दौरान रूस ने अपने कई आधुनिक नागरिक विमानों का प्रदर्शन किया। इनमें सुपरजेट एसजे-100, एमसी-21 और आईएल-114-300 जैसे क्षेत्रीय विमान शामिल रहे। इन विमानों को भारत के क्षेत्रीय विमानन बाजार के लिए संभावित विकल्प माना जा रहा है।
खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़ेगा सहयोग
बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि भारत और रूस के संबंध केवल विमान खरीदने और बेचने तक सीमित नहीं रहने चाहिए। दोनों देशों के बीच संयुक्त निर्माण, तकनीक साझा करने, रखरखाव और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा सकता है। इससे भारत में विमान निर्माण उद्योग को नई तकनीक और निवेश मिलने की संभावना है।
विमानन बनेगा रणनीतिक साझेदारी का नया स्तंभ
भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग रहा है। अब दोनों देश नागरिक विमानन क्षेत्र में भी साझेदारी को मजबूत करना चाहते हैं। यह सहयोग विमान निर्माण, रखरखाव, तकनीकी विकास और क्षेत्रीय हवाई सेवाओं के विस्तार तक पहुंच सकता है।
इनोप्रोम इंडिया कार्यक्रम में बढ़ा औद्योगिक सहयोग
नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय इनोप्रोम इंडिया कार्यक्रम में भारत और रूस की 120 से अधिक कंपनियां भाग ले रही हैं। इस मंच पर विमानन, विनिर्माण, तकनीक और औद्योगिक साझेदारी से जुड़े कई प्रस्तावों पर चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि यह कार्यक्रम दोनों देशों के आर्थिक और औद्योगिक संबंधों को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
