यूपीआई पर नए शुल्क को लेकर बढ़ा सियासी बवाल, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से की यूपीआई टैक्स वापस लेने की मांग

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डिजिटल भुगतान माध्यम यूपीआई पर नए शुल्क ढांचे के लागू होने के बाद राजनीतिक हलचल अचानक काफी तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी और केंद्र सरकार के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिल रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस नए शुल्क ढांचे का कड़ा विरोध करते हुए प्रधानमंत्री से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। राहुल गांधी ने इस व्यवस्था को आम नागरिकों पर लगाया गया एक नया टैक्स करार दिया है और सरकार के इस कदम की सार्वजनिक रूप से आलोचना की है।

वीडियो संदेश के जरिए प्रधानमंत्री पर सीधा हमला

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक विशेष वीडियो संदेश साझा करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यूपीआई के माध्यम से रोजाना लेनदेन करने वाले देश के आम लोगों, छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग पर इस फैसले का सीधा प्रतिकूल असर पड़ेगा। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को यूपीआई टैक्स का नाम देते हुए दावा किया कि डिजिटल इंडिया के तहत दी जाने वाली सुविधाओं पर इस तरह का अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना पूरी तरह से अनुचित है।

पूर्व प्रधानमंत्री के बयान का हवाला देकर कसा तंज

अपने वक्तव्य के दौरान राहुल गांधी ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़े एक पुराने संस्मरण का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब पूर्व में उनसे पूछा गया था कि वे राजनीति की किस विचारधारा या पक्ष में खड़ी हैं, तो उन्होंने स्पष्ट उत्तर दिया था कि वे न तो बाईं तरफ हैं और न ही दाईं तरफ, बल्कि वे सीधे देश के हित में खड़ी हैं। इस उदाहरण के जरिए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को भी किसी पक्ष की आड़ लेने के बजाय देश की जनता के सीधे हित में फैसला लेना चाहिए।

व्यापारिक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय असर पर उठाए सवाल

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने आरोप लगाया कि नए शुल्क ढांचे की वजह से होने वाले वित्तीय लेन-देन का लाभ अप्रत्यक्ष रूप से विदेशी कंपनियों और वैश्विक बाजारों को पहुंचेगा। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि वे डिजिटल पेमेंट पर लगाए गए इन सभी नए शुल्कों को तुरंत प्रभाव से रद्द करें। इस बयान के बाद से ही डिजिटल बैंकिंग और यूपीआई के भविष्य से जुड़े इस फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं।

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