दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को मिलेगा दादा साहब फाल्के पुरस्कार,

भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपनी बहुमुखी प्रतिभा और अलग पहचान बनाने वाले वरिष्ठ अभिनेता अनंत नाग को सिनेमा जगत के सबसे बड़े सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने पांच दशकों से अधिक लंबे अपने शानदार करियर में विभिन्न भाषाओं की फिल्मों में काम किया है। उनकी इस उपलब्धि से कन्नड़ और हिंदी सिनेमा सहित पूरे देश के कला जगत में खुशी का माहौल है। 22 सितंबर को गुजरात के केवड़िया में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया जाएगा।
प्रारंभिक जीवन और अभिनय करियर की शुरुआत
कर्नाटक में 4 सितंबर 1948 को जन्मे अनंत नाग ने अपने अभिनय सफर की शुरुआत रंगमंच से की थी। थिएटर की दुनिया में पहचान बनाने के बाद उन्होंने कन्नड़ फीचर फिल्म संकल्प से बड़े पर्दे पर कदम रखा। इसके बाद उन्होंने श्याम बेनेगल की प्रसिद्ध हिंदी फिल्म अंकुर से बॉलीवुड में पदार्पण किया। उनकी सादगी, बेहतरीन संवाद शैली और स्वाभाविक अभिनय ने उन्हें दर्शकों और समीक्षकों का प्रिय बना दिया।
विविध भाषाओं और यादगार भूमिकाओं में योगदान
पांच दशकों के अपने करियर में अनंत नाग ने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया है। उन्होंने कन्नड़ और हिंदी के अलावा तेलुगु, मलयालम, तमिल और मराठी सिनेमा में भी अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया। मिंचिना ओटा, हंसागीते और मंथन जैसी फिल्में उनके अभिनय की श्रेष्ठता को दर्शाती हैं। दूरदर्शन के मशहूर धारावाहिक मालगुडी डेज़ में उनकी भूमिका को आज भी भारतीय टेलीविजन इतिहास के सबसे यादगार प्रदर्शनों में गिना जाता है। वर्ष 2023 में उन्होंने सिनेमा में अपने पचास साल पूरे होने पर स्वर्ण जयंती मनाई थी।
सम्मान, पुरस्कार और राजनीतिक सफर
भारतीय कला और संस्कृति में अनंत नाग के योगदान को समय-समय पर सराहा गया है। उन्हें पांच बार फिल्मफेयर पुरस्कार और पांच बार कर्नाटक राज्य सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। इसके अतिरिक्त उन्हें कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार और बेंगलुरु विश्वविद्यालय उत्तर से मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी मिली है। कला के अलावा उन्होंने सार्वजनिक सेवा में भी योगदान दिया है। वे कर्नाटक विधान परिषद और विधानसभा के सदस्य रहे तथा राज्य सरकार में मंत्री पद भी संभाला। भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है।
दादासाहेब फाल्के पुरस्कार का ऐतिहासिक महत्व
दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1969 में हुई थी और पहली बार यह पुरस्कार अभिनेत्री देविका रानी को दिया गया था। यह सम्मान भारत की पहली मूक फिल्म राजा हरिश्चंद्र के निर्माता-निर्देशक दादासाहेब फाल्के की स्मृति में दिया जाता है। भारतीय सिनेमा के संवर्धन और विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को यह पुरस्कार दिया जाता है, जिसके तहत स्वर्ण कमल पदक, एक शॉल और दस लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की जाती है।
