रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिका का बड़ा प्रहार, 100 प्रतिशत टैरिफ वाला बिल संसद से पारित

अमेरिकी संसद ने एक बेहद कड़ा और नया व्यापारिक कानून पारित किया है। इस कानून के तहत रूस से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का आयात जारी रखने वाले प्रमुख देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक का भारी सीमा शुल्क लगाया जा सकता है। यह कदम मॉस्को की ऊर्जा कमाई पर सीधा प्रहार करने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि यूक्रेन में जारी सैन्य अभियानों को मिलने वाली आर्थिक मदद को पूरी तरह रोका जा सके।
प्रतिनिधि सभा में इस विधेयक को भारी समर्थन के साथ पारित कर दिया गया। इससे पहले सीनेट भी इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे चुकी है। अब यह मसौदा अंतिम स्वीकृति के लिए व्हाइट हाउस भेजा जा रहा है, जहां राष्ट्रपति के इस पर हस्ताक्षर करने की पूरी उम्मीद जताई गई है।
वैश्विक बाजार और ऊर्जा आयातक देशों पर असर
इस कानून का सबसे बड़ा असर उन प्रमुख देशों पर पड़ सकता है जो रूस से भारी मात्रा में ऊर्जा संसाधनों की खरीदारी करते हैं। अमेरिकी व्यापार विभाग हर छह महीने में एक विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसमें रूस से तेल और गैस आयात करने वाले राष्ट्रों की सूची को अद्यतन किया जाएगा। हालांकि, जिन देशों के पास रूसी गैस का आयात एक निश्चित सीमा से कम है और वे अपनी निर्भरता घटाने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं, उन्हें इस नियम में राहत देने का प्रावधान भी रखा गया है।
इस विधेयक में किसी विशेष देश का नाम अलग से नहीं दिया गया है, लेकिन वैश्विक व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि यह नीति एशियाई और यूरोपीय ऊर्जा खरीदारों के लिए नई व्यापारिक चुनौतियां खड़ी कर सकती है।
वित्तीय संस्थानों और पोत परिवहन पर शिकंजा
केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि इस विधेयक के जरिए रूस के बैंकिंग और परिवहन ढांचे को भी घेरने की योजना है। जो भी विदेशी बैंक प्रतिबंधित रूसी वित्तीय संस्थानों के साथ महत्वपूर्ण लेनदेन करेंगे, वे भी अमेरिकी पाबंदियों के दायरे में आ जाएंगे। इसके अतिरिक्त रूसी तेल का परिवहन करने वाले जहाजों, उनके मालिकों, बंदरगाहों और बीमा कंपनियों पर भी सख्त प्रतिबंध लागू किए जाएंगे।
इस कानून के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों के लिए रूस के ऊर्जा क्षेत्र में किसी भी प्रकार के नए निवेश करने और रूसी सरकारी कर्ज खरीदने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
संसद में तीखी बहस और राजनीतिक आपत्तियां
विधेयक को पारित कराने के दौरान अमेरिकी संसद के भीतर व्यापक चर्चा देखने को मिली। विपक्षी दल के कई सदस्यों ने इस विधेयक के पक्ष में मतदान किया, लेकिन कुछ प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति को मिलने वाले असीमित टैरिफ अधिकारों पर अपनी चिंता जताई। उनका कहना था कि इन अधिकारों का इस्तेमाल अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नीतियों से इतर राजनीतिक उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है।
दूसरी तरफ, विधेयक का समर्थन करने वाले सांसदों का तर्क था कि जब तक आक्रामकता की कीमत को अत्यधिक बढ़ा नहीं दिया जाता, तब तक बातचीत के जरिए शांति स्थापित करना संभव नहीं होगा।
शांति समझौते की शर्त और आगे का रास्ता
कानून के प्रावधानों के अनुसार, इन सख्त आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया आसान नहीं होगी। यदि भविष्य में रूस इन पाबंदियों से राहत चाहता है, तो उसे यूक्रेन की स्वतंत्र सरकार द्वारा स्वीकार किए गए शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने होंगे और अपनी सैन्य कार्रवाइयों को पूरी तरह रोकना होगा। संसद द्वारा समीक्षा किए जाने के बाद ही इन प्रतिबंधों को हटाया जा सकेगा।
