केरल में गहराया गंभीर बिजली संकट, सरकार ने फ्लोटिंग सोलर और बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं की ओर बढ़ाए कदम

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तपती गर्मी, जलाशयों में पानी की भारी गिरावट और बिजली की बढ़ती खपत ने केरल को एक गंभीर ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। इस स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार अब नए और दीर्घकालिक विकल्पों पर काम कर रही है। ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स और पंप्ड-स्टोरेज सुविधाओं को तेजी से लागू करने की तैयारी की जा रही है। हाल ही में आयोजित एक ऊर्जा सम्मेलन के दौरान इन रणनीतियों पर व्यापक चर्चा हुई, जहां बिजली आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए।

भीषण गर्मी और बिजली की रिकॉर्ड मांग

राज्य में बीते कुछ समय से अधिकतम बिजली मांग और वास्तविक उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर देखा जा रहा है। भीषण गर्मी के कारण घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बिजली की खपत अचानक काफी बढ़ गई है। मांग पांच हजार मेगावाट के आंकड़े को पार कर गई है, जबकि उपलब्धता इससे काफी कम बनी हुई है। इस असंतुलन के कारण दैनिक आपूर्ति को बनाए रखने के लिए मजबूरन पाबंदियां लगानी पड़ रही हैं।

पारंपरिक जलविद्युत पर निर्भरता की चुनौती

केरल की बिजली व्यवस्था काफी हद तक जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य राज्यों से खरीदी जाने वाली बिजली पर निर्भर रही है। इस साल कम बारिश होने के कारण प्रमुख जलाशयों का जलस्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे जलविद्युत उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। दूसरी तरफ, देश के अन्य हिस्सों में भी गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ने से बाहरी स्रोतों से मिलने वाली बिजली की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस स्थिति ने राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की जरूरत को और उजागर कर दिया है।

सस्टेनेबल और नए विकल्पों की तलाश

केरल की विशेष भौगोलिक स्थिति और भूमि की सीमित उपलब्धता के कारण यहां बड़े पैमाने पर जमीन आधारित सौर या पवन ऊर्जा संयंत्र लगाना आसान नहीं है। ऐसे में जलाशयों के पानी पर तैरने वाले फ्लोटिंग सोलर पैनल एक बेहतर विकल्प बनकर उभरे हैं। जानकारों का मानना है कि राज्य के विभिन्न जलाशयों का सही इस्तेमाल करके कई हजार मेगावाट बिजली पैदा की जा सकती है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

ऊर्जा संरक्षण और आधुनिक तकनीक की आवश्यकता

तत्काल राहत पाने के लिए ऊर्जा बचत को एक मुख्य नीति के रूप में अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। घरों में रूफटॉप सोलर लगाने का चलन बढ़ा है, जिससे बिजली उपयोग के पैटर्न में बदलाव आ रहा है। उपभोक्ताओं को अपनी खपत पर नजर रखने और बिजली बचाने के लिए जागरूक करने वाली डिजिटल प्रणालियों की जरूरत महसूस की जा रही है। इसके अलावा, सौर, पवन और छोटे जलविद्युत संयंत्रों को एक एकीकृत प्रबंधन प्रणाली से जोड़ने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।

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