पीएम मोदी ने बताया भारत की हरित क्रांति का रोडमैप, हाइड्रोजन ट्रेन से लेकर नेचुरल फार्मिंग तक

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द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों और हरित उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश आज के समय में तेजी से सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। भारत में क्लीन मोबिलिटी से लेकर ग्रीन हाइड्रोजन जैसे आधुनिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर काम शुरू हो चुका है। सरकार की नीतियां और देश के लोगों की भागीदारी मिलकर एक नई हरित क्रांति की नींव रख रही हैं।

क्लीन मोबिलिटी और हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भारत ने एक नई उपलब्धि हासिल की है। देश में पहली हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन शुरू हो चुका है जो दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन है। यह कदम देश में क्लीन मोबिलिटी के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। हाइड्रोजन ईंधन का उपयोग परिवहन क्षेत्र से निकलने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने में बेहद मददगार साबित होगा। आने वाले समय में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को पूरी तरह से स्वच्छ ऊर्जा पर आधारित बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

रिन्यूएबल और न्यूक्लियर एनर्जी में अभूतपूर्व बढ़ोतरी

ऊर्जा क्षेत्र में भी पिछले कुछ वर्षों के दौरान बड़े बदलाव देखे गए हैं। बीते 12 सालों में भारत की विंड एनर्जी क्षमता में तीन गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही जल विद्युत क्षमता में भी मजबूत वृद्धि हुई है। भारत अब अपनी पारंपरिक ऊर्जा निर्भरता को घटाते हुए न्यूक्लियर एनर्जी और सोलर पावर पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।

नॉन-फॉसिल एनर्जी और प्राइवेट सेक्टर की भूमिका

सरकार ने ऊर्जा के नए स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए निजी कंपनियों के लिए भी रास्ते आसान किए हैं। निजी क्षेत्र की भागीदारी के कारण देश की नॉन-फॉसिल एनर्जी क्षमता में चार सौ प्रतिशत का बड़ा उछाल आया है। इस अभूतपूर्व वृद्धि से यह साबित होता है कि भारत हरित ऊर्जा के उत्पादन में विश्व स्तर पर अग्रणी बनने की राह पर है।

इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में रिकॉर्ड वृद्धि

भारत में ई-मोबिलिटी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आया है। वर्ष 2014 से पहले जहां देश में हर साल महज तीन हजार के करीब इलेक्ट्रिक वाहन बिकते थे वहीं पिछले वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 25 लाख पहुंच गया। इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में हुआ यह इजाफा न केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर को नई दिशा दे रहा है बल्कि पेट्रोल-डीजल से होने वाले प्रदूषण को घटाने में भी सहायक बन रहा है।

सड़क और मेट्रो नेटवर्क के जरिए ईंधन की बचत

सड़क परिवहन को सुगम बनाने के लिए लागू की गई फास्टैग व्यवस्था से टोल प्लाजा पर वाहनों के इंतजार का समय बहुत कम हुआ है। इससे लाखों लीटर ईंधन की बर्बादी रुकी है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2014 तक देश के केवल पांच शहरों में ढाई सौ किलोमीटर से कम मेट्रो लाइन थी। आज भारत के 20 से अधिक शहरों में मेट्रो सेवाएं संचालित हो रही हैं और देश की कुल मेट्रो नेटवर्क लंबाई एक हजार किलोमीटर को पार कर चुकी है।

रेलवे का पूर्ण विद्युतीकरण और डीजल की बचत

भारतीय रेलवे के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य को पूरा कर लिया गया है। इस कदम से रोजाना करोड़ों लीटर डीजल की बचत हो रही है और कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में भारी गिरावट आई है। यह विकास कार्य न केवल तेज गति से पूरे हो रहे हैं बल्कि पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल भी हैं।

जल संरक्षण और अमृत सरोवर का निर्माण

जल संकट से निपटने और भूजल स्तर को सुधारने के लिए देश भर में जल संरक्षण का काम बड़े स्तर पर किया जा रहा है। अब तक देश में 70 हजार से ज्यादा अमृत सरोवर तैयार किए जा चुके हैं। इसके अलावा कैच द रेन पहल के तहत पूरे भारत में लगभग डेढ़ करोड़ जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं जो बारिश के पानी को सहेजने में मदद कर रही हैं।

नेचुरल फार्मिंग और जलवायु-अनुकूल फसलें

कृषि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल कम करने के लिए नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग चलाया जा रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में साढ़े बारह लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के क्लस्टर बनाए गए हैं। इसके साथ ही मौसम के बदलाव को सहन करने में सक्षम करीब तीन हजार किस्म की नई फसलें भी विकसित की गई हैं।

वन क्षेत्र में बढ़ोतरी और कार्बन फुटप्रिंट में कमी

कृषि वानिकी को बढ़ावा देकर कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने की कोशिशें लगातार जारी हैं। पिछले 12 वर्षों के दौरान भारत के अत्यधिक घने जंगलों के क्षेत्रफल में 22 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यह आंकड़ा दिखाता है कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ जंगलों को बचाने और बढ़ाने के प्रयास सफल हो रहे हैं।

सर्कुलर इकोनॉमी और वेस्ट मैनेजमेंट

प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के लिए भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगाई गई है। रिड्यूस, रीयूज और रीसाइकल के सिद्धांत को अपनाते हुए सर्कुलर इकोनॉमी को प्राथमिकता दी जा रही है। हर दिन हजारों टन कचरे का पुनर्चक्रण किया जा रहा है। गांवों में गोबरधन योजना के माध्यम से पशुधन के गोबर और जैविक कचरे को बायोगैस और खाद जैसे उपयोगी संसाधनों में बदला जा रहा है।

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