सूरत से चेन्नई एक्सप्रेसवे: 36 घंटे का थकाऊ सफर अब सिर्फ 16 घंटे में होगा पूरा, 5 राज्यों को जोड़ेगा यह 6-लेन कॉरिडोर

देश में बुनियादी ढांचे और सड़क परिवहन को नई रफ्तार देने के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसी कड़ी में गुजरात के सूरत से तमिलनाडु के चेन्नई तक बनने वाला नया एक्सप्रेसवे यात्रियों और व्यापारियों के लिए एक बहुत बड़ी सौगात साबित होने वाला है। पारंपारिक राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी ट्रैफिक और खराब रास्तों के कारण जिस सफर को पूरा करने में पहले छत्तीसगढ़ घंटे तक का लंबा समय लग जाता था, वह अब बहुत जल्द सिमटने वाला है। भारतमाला परियोजना के तहत तैयार किया जा रहा यह नया एक्सप्रेसवे इस दूरी को घटाकर महज सोहल घंटे का बना देगा।
मार्ग में बदलाव और नई दूरी का गणित
शुरुआती योजना के अनुसार यह पूरा एक्सप्रेसवे लगभग बारह सौ इकहत्तर किलोमीटर लंबा प्रस्तावित किया गया था। हालांकि हाल ही में हुए प्रशासनिक पुनर्मूल्यांकन और रूट संशोधन के बाद इसके सूरत और नासिक वाले हिस्से के प्रारूप में कुछ बदलाव किए गए हैं। इस संशोधन के बाद अब इस पूरे एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई घटकर लगभग नौ सौ किलोमीटर रह गई है। रूट में इस बड़े बदलाव के बावजूद सूरत और चेन्नई के बीच सीधा और बिना किसी बाधा का संपर्क पूरी तरह से कायम रहेगा, जिससे यात्रियों के कई घंटे बचेंगे।
पांच राज्यों को आपस में जोड़ेगा छह लेन का नेटवर्क
यह छह लेन वाला ग्रीनफील्ड कॉरिडोर देश के पांच बड़े राज्यों से होकर गुजरेगा और कई प्रमुख औद्योगिक शहरों को आपस में सीधे जोड़ेगा। गुजरात के सूरत से शुरू होकर यह कॉरिडोर महाराष्ट्र के नासिक, अहमदनगर, सोलापुर और अक्कलकोट जैसे शहरों को कवर करेगा। इसके बाद यह मार्ग कर्नाटक के कलबुर्गी और रायचूर से होते हुए तेलंगाना के गढ़वाल पहुंचेगा। आंध्र प्रदेश में कुरनूल, कडप्पा और तिरुपति को जोड़ते हुए यह तमिलनाडु के चेन्नई में समाप्त होगा। इस विस्तृत नेटवर्क से राज्यों के बीच व्यापार और माल ढुलाई की लागत में भारी कमी आएगी।
विभिन्न खंडों में निर्माण कार्य और बजट
इस मेगा प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए अलग-अलग चरणों में तेजी से निर्माण कार्य किया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने अपने राज्य में पड़ने वाले तीन सौ चौहत्तर किलोमीटर लंबे नासिक-सोलापुर-अक्कलकोट खंड को मंजूरी दे दी है। इस हिस्से के निर्माण पर लगभग उन्नीस हजार एक सौ बयालीस करोड़ रुपये की लागत आएगी। वहीं दूसरी ओर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच पड़ने वाले एक सौ सतहत्तर किलोमीटर लंबे मार्ग पर भी काम शुरू कर दिया गया है, जहां जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है।
परियोजना पूरी होने की समयसीमा और लाभ
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस पूरे प्रोजेक्ट को दो हजार सत्ताईस के अंत तक पूरा करने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू हो जाने के बाद गुजरात से तमिलनाडु और पूरे दक्षिण भारत का सफर बेहद सुगम और समय की बचत करने वाला बन जाएगा। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में आने वाली तेजी से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और औद्योगिक गलियारों का तेजी से विकास संभव हो सकेगा।
