महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का किसानों और राहत कार्यों के लिए बड़ा ऐलान

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महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में गहराते जल संकट और सूखे से निपटने के लिए एक व्यापक राहत पैकेज की घोषणा की है। राज्य के कुल 358 तालुकों में से 265 तालुकों को औपचारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित कर दिया गया है। यह फैसला ट्रिगर-1 के कड़े मानकों को पूरा करने के बाद लिया गया है। इस निर्णय से साफ जाहिर होता है कि राज्य का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा इस समय जल संकट और सूखे जैसी भयावह स्थिति का सामना कर रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देने और स्थानीय स्तर पर राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन को तुरंत काम पर लगा दिया गया है।

सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को वित्तीय राहत देने के लिए सरकार ने बहुस्तरीय योजना बनाई है। इसके तहत सबसे पहले लैंड रेवेन्यू यानी भू-राजस्व में छूट देने का फैसला किया गया है। कृषि संकट को देखते हुए किसानों के फसल लोन का रीस्ट्रक्चर किया जाएगा ताकि उन्हें तुरंत पुनर्भुगतान का दबाव न झेलना पड़े। इसके अतिरिक्त खेती से जुड़े सभी प्रकार के लोन की रिकवरी पर तत्काल रोक लगा दी गई है।

किसान राहत उपाय

बिजली संकट और सिंचाई की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बिजली बिलों में बड़ी राहत दी गई है। राज्य में 7.5 हॉर्स पावर क्षमता वाले इलेक्ट्रिक कृषि पंपों का बिजली बिल पहले ही माफ किया जा चुका है। अब सरकार ने निर्णय लिया है कि इससे अधिक क्षमता वाले इलेक्ट्रिक पंपों के मौजूदा बिजली बिलों में भी विशेष छूट दी जाएगी। संकट की इस घड़ी में किसी भी किसान का बिजली कनेक्शन नहीं काटने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

विद्यार्थी और मजदूर राहत

सूखे का प्रभाव केवल खेती तक सीमित न रहे, इसे ध्यान में रखते हुए समाज के अन्य वर्गों के लिए भी राहत के रास्ते खोले गए हैं। प्रभावित तालुकों के स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों की परीक्षा शुल्क माफ करने का निर्णय लिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बनाए रखने के लिए एम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम के नियमों में ढील दी जा रही है ताकि अधिक से अधिक विकास और निर्माण कार्य शुरू किए जा सकें और मजदूरों को स्थानीय स्तर पर ही काम मिल सके।

पानी और चारे का प्रबंध

पेयजल संकट से निपटने के लिए राज्य प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड पर है। जिन इलाकों में पीने के पानी की कमी है, वहां तुरंत टैंकरों के जरिए जलापूर्ति की जाएगी। इसके अलावा मवेशियों और जानवरों के लिए चारे और पानी का उचित इंतजाम किया जा रहा है। सरकार बड़े पैमाने पर जल संरक्षण के कार्यों को भी बढ़ावा दे रही है। पिछले आदेशों के तहत पेयजल और पशुओं के लिए पानी की दीर्घकालिक प्लानिंग जारी रखी जाएगी।

पंचनामा और तकनीकी निगरानी

नुकसान का सटीक आकलन करने के लिए सभी जिला कलेक्टर्स को पंचनामा प्रक्रिया तुरंत पूरी करने के आदेश जारी किए गए हैं। इस बार प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए आधुनिक तकनीक की मदद ली जा रही है। खेतों में फसलों की वास्तविक स्थिति दर्शाने वाली तस्वीरें और जीपीएस से डेटा एकत्र किया जा रहा है, ताकि राहत राशि के वितरण में किसी भी तरह की गड़बड़ी या देरी न हो सके।

कर्ज माफी का आश्वासन

पूर्व में वाशिम दौरे के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ किया था कि राज्य सरकार प्रभावित क्षेत्रों के लिए जल्द ही एक विस्तृत सरकारी आदेश जारी करेगी। इसके साथ ही खेती-किसानी के बढ़ते संकट से जूझ रहे राज्य के उन सभी पात्र किसानों को फसल कर्ज माफी का लाभ दिया जाएगा जो पिछली योजनाओं के दायरे से बाहर रह गए थे। इस घोषणा से हजारों ऐसे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है जो बीते समय में सहायता से वंचित रह गए थे।

ग्रामीण राहत प्राथमिकता

ग्रामीण इलाकों में चौपालों और बैठकों के दौरान किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया था कि पूरा सरकारी तंत्र ग्रामीण राहत कार्यों को प्राथमिकता पर रखेगा। आर्थिक मदद के अलावा राज्य प्रशासन पीने के पानी की निर्बाध सप्लाई, मवेशियों के लिए चारे के वितरण और फसल नुकसान का पंचनामा तेजी से पूरा करने के लिए आपातकालीन कदम उठा रहा है। इन सभी एकीकृत प्रयासों का उद्देश्य राज्य के किसानों और ग्रामीण नागरिकों को सूखे के इस भीषण संकट से बाहर निकालना है।

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