चार धाम यात्रा फिर से शुरू, मौसम साफ होने पर श्रद्धालुओं को मिली आगे बढ़ने की अनुमति

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम के मिजाज में आए सुधार के बाद ठप पड़ी प्रसिद्ध चार धाम यात्रा को एक बार फिर से खोल दिया गया है। बीते दो दिनों से सुरक्षा कारणों और लगातार हो रही बारिश की वजह से तीर्थयात्रियों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। जैसे ही सोमवार सुबह प्रशासन की ओर से यात्रा को हरी झंडी मिली, वैसे ही विभिन्न राज्यों और विदेशों से आए श्रद्धालुओं के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। ऋषिकेश और आसपास के पड़ावों पर रुके हुए हजारों लोग अब अपने गंतव्य यानी केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की ओर प्रस्थान करने लगे हैं।
श्रद्धालुओं का उत्साह और प्रशासनिक तैयारी
ऋषिकेश स्थित यात्रा नियंत्रण संगठन द्वारा स्थिति की समीक्षा करने के बाद गढ़वाल मंडल के आयुक्त ने दो दिनों से लागू प्रतिबंधों को हटाने का फैसला सुनाया। अधिकारियों का कहना है कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सरकार और स्थानीय प्रशासन के लिए सबसे पहली प्राथमिकता है। भले ही यात्रा फिर से शुरू कर दी गई है, लेकिन पर्वतीय इलाकों में मौसम का भरोसा न होने के कारण सभी संवेदनशील जगहों पर नोडल अधिकारियों और पुलिस बल को अलर्ट पर रखा गया है। विभिन्न पड़ावों पर स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त रखा गया है ताकि किसी भी अनहोनी से निपटा जा सके।
दो दिनों के मौसम का हाल
हाल ही में उत्तराखंड के बड़े हिस्से में भारी बारिश दर्ज की गई थी। मौसम विभाग की ओर से जारी चेतावनी को देखते हुए 26 और 27 सितंबर को यात्रा पर एहतियातन ब्रेक लगाया गया था। इस दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान में भारी गिरावट देखी गई और शनिवार के दिन चमोली जिले में स्थित प्रसिद्ध सिख तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब में सीजन की पहली बर्फबारी भी दर्ज की गई। मौसम के सख्त तेवरों को देखते हुए उत्तरकाशी के स्थानीय प्रशासन ने गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले रास्तों पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ही रोक दिया था।
कमिश्नर का बयान और दिशा-निर्देश
सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए गढ़वाल कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में मौसम पूरी तरह से अनुकूल है और किसी भी तरह की आपदा की चेतावनी प्रभाव में नहीं है। उन्होंने बताया कि सभी संबंधित जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में यातायात और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि मार्ग में किसी भी प्रकार का भूस्खलन होने पर उसे तुरंत साफ किया जाए ताकि मार्गों पर जाम की स्थिति पैदा न हो।
स्थानीय जिलाधिकारियों को मिले विशेष अधिकार
उच्च अधिकारियों ने जमीनी स्तर की स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारियों को विशेष अधिकार प्रदान किए हैं। यदि किसी क्षेत्र में अचानक तेज बारिश होती है या मार्ग अवरुद्ध होता है, तो वहां के स्थानीय जिलाधिकारी परिस्थितियों के अनुसार यात्रा को रोकने या समय सारणी बदलने का फैसला स्वतंत्र रूप से ले सकते हैं। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह है कि दूरदराज के क्षेत्रों में फंसे लोगों तक तुरंत राहत पहुंचाई जा सके और बिना किसी देरी के त्वरित निर्णय लिए जा सकें।
तीर्थयात्रियों के लिए जरूरी हिदायत
प्रशासन की ओर से यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं से लगातार अपील की जा रही है कि वे अपनी यात्रा के दौरान सतर्कता बरतें। चूंकि पहाड़ी मार्गों पर मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा आगे बढ़ाने से पहले दैनिक मौसम बुलेटिन जरूर जांच लें। इसके अलावा, मार्ग में मौजूद पुलिस अधिकारियों और आपदा प्रबंधन दल द्वारा दिए जाने वाले निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है ताकि किसी भी तरह की असुविधा या जोखिम से बचा जा सके।
