संसद में हंगामे के बीच सरकार ने पास कराए कई अहम विधेयक, FCRA संशोधन बिल JPC को भेजने का फैसला

लोकसभा में मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के लगातार हंगामे और विरोध के बावजूद सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सफल रही। सदन में कई मौकों पर विपक्षी सदस्यों की गैरमौजूदगी या चर्चा में हिस्सा नहीं लेने के कारण विधेयकों पर विस्तृत बहस नहीं हो सकी और कुछ प्रस्ताव बिना लंबी चर्चा के ही पारित हो गए। इस दौरान सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए कई अहम कानूनों में बदलाव से जुड़े विधेयकों को लोकसभा से मंजूरी दिलाई।
मानसून सत्र में लोकसभा से पारित प्रमुख विधेयकों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक भी शामिल रहा। यह विधेयक खनन और खनिज क्षेत्र से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों में संशोधन से संबंधित है। खनिज संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और क्षेत्र से जुड़े नियमों को मजबूत करने के उद्देश्य से किए जाने वाले बदलावों को लेकर यह विधेयक महत्वपूर्ण माना गया।
इसी सत्र में केरल राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ किए जाने से संबंधित केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक भी लोकसभा से पारित हुआ। राज्य के नाम में बदलाव का यह प्रस्ताव लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। विधेयक के पारित होने के बाद केरल के आधिकारिक नाम को लेकर आगे की संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया का रास्ता साफ हुआ है।
लोकसभा ने सर्वोच्च न्यायालय से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण विधेयक को भी मंजूरी दी। सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक के जरिए शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या से संबंधित प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। न्यायिक व्यवस्था पर बढ़ते काम के दबाव और लंबित मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट की संरचना से जुड़ा यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक भी लोकसभा से पारित हुआ। इस विधेयक का संबंध कर व्यवस्था और उससे जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों में संशोधन से है। सरकार की ओर से कर संबंधी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और मौजूदा प्रावधानों में आवश्यक बदलाव करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव बना रहा। विपक्षी दल कई मुद्दों को लेकर सदन में विरोध करते रहे और कई बार हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित हुई। इस राजनीतिक गतिरोध का असर विधेयकों पर होने वाली चर्चा पर भी पड़ा। कुछ विधेयक ऐसे समय में पारित हुए जब विपक्षी सदस्य सदन में चर्चा में सक्रिय रूप से शामिल नहीं थे।
इसी बीच लोकसभा ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला किया। बुधवार को सदन ने इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी के पास भेजने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। इसका मतलब है कि FCRA संशोधन विधेयक पर अब संयुक्त संसदीय समिति विस्तृत विचार-विमर्श करेगी और अपनी रिपोर्ट के जरिए आगे की विधायी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इस तरह मानसून सत्र में एक ओर जहां संसद में विपक्ष और सरकार के बीच लगातार राजनीतिक गतिरोध देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर सरकार कई अहम विधेयकों को आगे बढ़ाने में सफल रही। लोकसभा में पारित इन विधेयकों का प्रभाव खनन, राज्य के नाम, न्यायपालिका और कर व्यवस्था जैसे अलग-अलग क्षेत्रों पर पड़ सकता है। FCRA संशोधन विधेयक को जेपीसी के पास भेजे जाने से इस कानून में प्रस्तावित बदलावों पर आगे विस्तृत संसदीय समीक्षा की संभावना भी बढ़ गई है।
