निर्वाचन आयोग और SIR के खिलाफ विपक्षी सांसदों का हल्लाबोल, संसद से सड़क तक विरोध प्रदर्शन तेज

देश की राजधानी में एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। विपक्षी दलों के गोलबंद गठबंधन के लगभग 140 से अधिक सांसदों ने चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियों और विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में संसद भवन परिसर से लेकर निर्वाचन आयोग मुख्यालय तक एक विशाल पैदल मार्च निकाला। संसद भवन के मकर द्वार से शुरू हुआ यह प्रदर्शन लोकतंत्र की रक्षा और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था की मांग को लेकर आयोजित किया गया। सांसदों के इस कड़े रुख से राजधानी के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।
सड़क पर उतरा विपक्ष
संसद भवन परिसर से शुरू हुए इस विरोध मार्च में विपक्षी गठबंधन के प्रमुख नेताओं, सांसदों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए सांसदों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए जम कर नारेबाजी की। नेताओं का कहना है कि वर्तमान में जिस प्रकार से मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और इससे निष्पक्ष चुनाव कराने की मूल अवधारणा प्रभावित हो रही है। इसी मुख्य मुद्दे को लेकर सभी सांसद एक सुर में अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
विरोध प्रदर्शन और मार्च की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए। संसद भवन से लेकर निर्वाचन आयोग तक जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी। जैसे ही सांसदों का जत्था संसद भवन से बाहर निकलकर आगे बढ़ने लगा, सुरक्षाबलों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनकारी सांसदों के बीच तीखी बहस और कहासुनी भी देखने को मिली। सांसदों ने आरोप लगाया कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और संवैधानिक संस्था तक जाने से रोका जा रहा है।
संवैधानिक संस्थाओं की साख पर सवाल
प्रदर्शन के दौरान मुख्य विपक्षी नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। विशेष रूप से निर्वाचन आयोग जैसी संस्था, जिस पर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी है, उसे सभी संदेहों से परे काम करना चाहिए। विपक्षी नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में जो अनियमितताएं सामने आ रही हैं, उनका तुरंत समाधान किया जाना बेहद जरूरी है। यदि इस प्रक्रिया को सुधारा नहीं गया तो देश की लोकतांत्रिक नींव कमजोर हो जाएगी।
सड़क पर ही धरने पर बैठे नेता
पुलिस द्वारा आगे बढ़ने से रोके जाने के बाद आक्रोशित सांसदों ने बीच सड़क पर ही बैठकर धरना देना शुरू कर दिया। सांसदों का कहना था कि जब तक उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं सुना जाता और चुनाव प्रणाली से जुड़ी उनकी आशंकाओं को दूर नहीं किया जाता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। सड़क पर बैठकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। इस वजह से राजधानी के मध्य क्षेत्र में यातायात व्यवस्था कुछ समय के लिए प्रभावित हुई और पुलिस को अन्य मार्गों पर गाड़ियों को मोड़ना पड़ा।
आगे की रणनीति और प्रदर्शन
विपक्षी दलों के समन्वय समिति के अनुसार, यह केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं है बल्कि इसके बाद भी सिलसिलेवार कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आने वाले दिनों में गठबंधन के नेता और कार्यकर्ता जिला स्तर और ब्लॉक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएंगे। उनका मानना है कि जनता को यह बताना बेहद जरूरी है कि उनके मताधिकार और लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ किस प्रकार से खिलवाड़ किया जा रहा है। विपक्षी दलों का दावा है कि इस जनआंदोलन के जरिए वे मतदाता सूची में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ एक बड़ा माहौल तैयार करेंगे।
देश भर में आंदोलन फैलाने की तैयारी
राजधानी दिल्ली में शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन केवल संसद और निर्वाचन आयोग के कार्यालय तक सीमित रहने वाला नहीं है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि आने वाले हफ्तों में राज्यों की राजधानियों में भी इसी प्रकार के बड़े मार्च निकाले जाएंगे। इसके साथ ही राष्ट्रपति से मुलाकात कर उन्हें इस पूरे मामले का एक ज्ञापन सौंपने की भी तैयारी की जा रही है। अब देखना यह होगा कि इस बड़े राजनीतिक गतिरोध और चौतरफा दबाव के बीच निर्वाचन आयोग और सरकार इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाती है।
