सेना प्रमुख धीरज सेठ ने एशियन गेम्स के पदक विजेताओं को किया सम्मानित, ओलंपिक 2028 के लिए दिया बड़ा संदेश

Untitled-1

भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन कर देश के लिए पदक जीतने वाले सेना के खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां देश के लिए गर्व का विषय हैं। सेना प्रमुख ने उम्मीद जताई कि ये खिलाड़ी आने वाले वर्षों में अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाएंगे तथा अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन करेंगे। सम्मान समारोह के दौरान खिलाड़ियों ने भी अपनी सफलता के अनुभव साझा किए और भविष्य में बड़े लक्ष्य हासिल करने की प्रतिबद्धता जताई।

सेना प्रमुख ने खिलाड़ियों की मेहनत और अनुशासन को सराहा

जनरल धीरज सेठ ने खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए कहा कि उनके साथ समय बिताना बेहद खुशी की बात है। उन्होंने खिलाड़ियों के प्रदर्शन को भारतीय सेना की कार्यशैली और देश के प्रति समर्पण से जोड़ते हुए कहा कि सेना जिस जज्बे के साथ देश की रक्षा करती है, उसी तरह खिलाड़ियों ने भी मेहनत, लगन और अनुशासन के दम पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।

सेना प्रमुख के मुताबिक, एशियाई स्तर और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में पदक जीतना आसान नहीं होता। इसके लिए वर्षों तक लगातार अभ्यास करना, मानसिक रूप से मजबूत बने रहना और मुश्किल परिस्थितियों में भी लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी है। खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत से यह साबित किया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास के जरिए बड़ी सफलताएं हासिल की जा सकती हैं।

उन्होंने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि भविष्य में उनका प्रदर्शन और बेहतर होगा। उनका संदेश केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं था, बल्कि खिलाड़ियों को अपने खेल का स्तर लगातार ऊंचा रखने और देश के लिए नई उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रेरित करना भी था।

नीरू ढांडा ने सेना के अनुशासन को बताया सफलता की वजह

एशियन गेम्स में शूटिंग स्पर्धा में तीन पदक जीतने वाली नीरू ढांडा ने अपनी सफलता पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना का हिस्सा रहते हुए देश के लिए पदक जीतना उनके लिए गर्व और सौभाग्य की बात है। नीरू ने अपनी उपलब्धि का श्रेय सेना में सीखे गए अनुशासन, एकाग्रता और कठिन परिस्थितियों में शांत रहने की क्षमता को दिया।

शूटिंग ऐसा खेल है जिसमें छोटी-सी चूक भी परिणाम बदल सकती है। खिलाड़ी को निशाना साधते समय अपने मन और शरीर पर पूरा नियंत्रण रखना पड़ता है। नीरू के अनुसार, सेना में रहते हुए उन्होंने इन गुणों को विकसित किया, जिनका फायदा उन्हें प्रतियोगिताओं में मिला।

उन्होंने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कई वर्षों तक लगातार मेहनत करनी पड़ी है। उनके लिए तीन पदक जीतना भारतीय सेना और देश के प्रति योगदान देने का एक छोटा-सा प्रयास है। नीरू ने यह भी बताया कि सेना प्रमुख खिलाड़ियों को हमेशा प्रोत्साहित करते हैं और उनसे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की अपेक्षा रखते हैं।

खिलाड़ियों को खेल का आनंद लेते हुए पूरी क्षमता के साथ मुकाबला करने की सलाह दी जाती है। नीरू के मुताबिक, इस तरह का मार्गदर्शन खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाता है और उन्हें दबाव के बीच बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करता है।

दीपक पूनिया का लक्ष्य ओलंपिक 2028 में गोल्ड मेडल

एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने वाले भारतीय पहलवान दीपक पूनिया ने माना कि एशियाई स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेना और पदक हासिल करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी चुनौती होती है। यहां अलग-अलग देशों के मजबूत खिलाड़ी मुकाबला करते हैं, इसलिए सफलता के लिए तकनीक, फिटनेस और मानसिक मजबूती पर लगातार काम करना पड़ता है।

दीपक ने बताया कि उनका अगला बड़ा लक्ष्य 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है। सेना प्रमुख से सम्मान मिलने के बाद उन्हें नई ऊर्जा और प्रेरणा मिली है। उनके अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों का प्रोत्साहन खिलाड़ियों को अपने लक्ष्य के प्रति अधिक गंभीरता से काम करने के लिए प्रेरित करता है।

ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर पदक जीतने के लिए लंबी और व्यवस्थित तैयारी की जरूरत होती है। दीपक का लक्ष्य है कि वह अपनी कमजोरियों पर काम करते हुए प्रदर्शन में सुधार करें और भविष्य की प्रतियोगिताओं में भारत के लिए बेहतर परिणाम हासिल करें।

गुलवीर सिंह ने लोगों की दुआओं और कोच के मार्गदर्शन को दिया श्रेय

एशियन गेम्स में तीन पदक जीतने वाले गुलवीर सिंह ने अपनी सफलता में देशवासियों के आशीर्वाद और शुभकामनाओं की अहम भूमिका बताई। उन्होंने कहा कि लोगों की छोटी-छोटी दुआएं भी खिलाड़ियों के लिए बहुत मायने रखती हैं। प्रशंसकों और देशवासियों का समर्थन मुश्किल समय में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

गुलवीर ने अपनी तैयारी के बारे में बताया कि वह कोच के निर्देशों का पालन करते हैं। खेलों में सफलता पाने के लिए केवल प्रतिभा पर्याप्त नहीं होती, बल्कि नियमित प्रशिक्षण, सही रणनीति, फिटनेस और अनुशासन भी जरूरी हैं। कोच की सलाह के अनुसार अभ्यास करने से खिलाड़ी अपनी तकनीक सुधार सकते हैं और प्रतियोगिता के दौरान बेहतर निर्णय ले सकते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि सेना प्रमुख ने खिलाड़ियों को भविष्य में ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया है। गुलवीर के अनुसार, भारतीय सेना खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए काफी प्रयास करती है। ऐसे में खिलाड़ियों की भी जिम्मेदारी है कि वे अपनी मेहनत और प्रदर्शन से सेना तथा देश का गौरव बढ़ाएं।

पुणे के प्रशिक्षण संस्थान से खिलाड़ियों को मिलती हैं सुविधाएं

भारतीय सेना में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और अभ्यास की सुविधाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। पुणे स्थित सेना के प्रशिक्षण संस्थान में खिलाड़ियों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे वे अपनी खेल क्षमता को निखार सकें।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले खिलाड़ियों के लिए नियमित अभ्यास के साथ बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था, शारीरिक क्षमता का विकास और मानसिक मजबूती बेहद जरूरी होती है। व्यवस्थित प्रशिक्षण से खिलाड़ियों को अपनी तकनीक सुधारने और बड़े मुकाबलों के लिए तैयार होने में सहायता मिलती है।

सेना से जुड़े खिलाड़ियों के लिए अनुशासन और जिम्मेदारी उनकी दिनचर्या का हिस्सा होते हैं। खेलों में इन गुणों का लाभ उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी एकाग्र रहने और लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करने में मिलता है।

कमलजीत ने नियमित अभ्यास को बताया गोल्ड मेडल का मंत्र

शूटिंग में स्वर्ण पदक जीतने वाले कमलजीत ने सफलता के लिए नियमित अभ्यास और निरंतरता को सबसे जरूरी बताया। उनके अनुसार, किसी भी खिलाड़ी को अपने खेल में बेहतर बनने के लिए लगातार मेहनत करनी पड़ती है। केवल एक प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसी स्तर को बनाए रखने के लिए नियमित अभ्यास करना जरूरी होता है।

कमलजीत ने बताया कि सेना प्रमुख ने खिलाड़ियों से ओलंपिक 2028 में भी इसी तरह शानदार प्रदर्शन करने और देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद जताई है। यह लक्ष्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है।

ओलंपिक 2028 पर नजर, भारतीय खिलाड़ियों के लिए नई चुनौती

एशियन गेम्स में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों का सम्मान भारतीय सेना में खेल प्रतिभाओं को मिलने वाले प्रोत्साहन को दर्शाता है। जनरल धीरज सेठ ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार रहने का संदेश दिया है।

नीरू ढांडा, दीपक पूनिया, गुलवीर सिंह और कमलजीत जैसे खिलाड़ियों के अनुभव बताते हैं कि सफलता के पीछे लगातार अभ्यास, अनुशासन, कोच का मार्गदर्शन और मानसिक मजबूती की अहम भूमिका होती है। अब इन खिलाड़ियों की नजर आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और 2028 के ओलंपिक पर है।

भारतीय सेना और खिलाड़ियों के बीच यह सहयोग देश में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। खिलाड़ियों का अगला लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि अपने प्रदर्शन में निरंतर सुधार करना और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाना भी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed