पीएम मोदी का ‘पावर टू एम्पॉवर’ विजन, भारत की GDP ग्रोथ 7.8% और स्टार्टअप्स की संख्या 2.5 लाख के पार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत ने शासन व्यवस्था और कार्य संस्कृति में ‘पावर टू एम्पॉवर’ यानी शक्ति के जरिए दूसरों को सशक्त बनाने के सिद्धांत को अपनाया है। नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक को नए अवसर उपलब्ध कराना भी है। प्रधानमंत्री के अनुसार, डिजिटल तकनीक, नवाचार, उद्यमिता और आर्थिक सुधार भारत की इस यात्रा के प्रमुख आधार बनकर उभरे हैं।
पावर टू एम्पॉवर से बदलेगा विकास का नजरिया
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि वास्तविक शक्ति केवल स्वयं आगे बढ़ने की क्षमता में नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने में भी निहित है। इसी सोच के आधार पर सरकार शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, समावेशी और अवसर-केंद्रित बनाने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति सामूहिक विकास और साझा अवसरों पर आधारित है। इसका अर्थ है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचे और लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का मौका मिले।
इस दृष्टिकोण में नागरिकों को केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी मानने के बजाय उन्हें विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने पर जोर दिया गया है। डिजिटल सेवाओं, वित्तीय समावेशन और उद्यमिता के विस्तार को इसी व्यापक सोच से जोड़कर देखा जा सकता है।
डिजिटल शक्ति ने खोले विकास के नए रास्ते
प्रधानमंत्री ने डिजिटल तकनीक को आधुनिक भारत के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उनके अनुसार, 21वीं सदी में तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार किसी देश की प्रगति के प्रमुख संसाधन बन चुके हैं।
भारत में डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने बैंकिंग, भुगतान, शिक्षा, कारोबार और सरकारी सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ाने में भूमिका निभाई है। स्मार्टफोन और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल ने छोटे कारोबारियों, युवाओं और उद्यमियों के लिए भी नए अवसर तैयार किए हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से कई सेवाओं का उपयोग पहले की तुलना में अधिक आसानी से किया जा सकता है। इससे समय की बचत, सेवाओं तक पहुंच और कारोबार के विस्तार की संभावनाएं बढ़ती हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी डिजिटल क्षमताओं का इस्तेमाल केवल घरेलू विकास के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों के लिए भी नए अवसर तैयार करने के उद्देश्य से करना चाहता है।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में अनिश्चितता के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत बताया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी विकास दर 7.8 प्रतिशत रही।
आर्थिक विकास दर में मजबूती देश में उत्पादन, सेवाओं, निवेश और उपभोग जैसी गतिविधियों के महत्व को दर्शाती है। भारत जैसे बड़े देश के लिए लगातार आर्थिक गतिविधियों को गति देना रोजगार, कारोबार और बुनियादी ढांचे के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
हालांकि, आर्थिक विकास का व्यापक लाभ सुनिश्चित करने के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना, महंगाई पर नियंत्रण रखना और छोटे कारोबारों को मजबूत बनाना भी जरूरी है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया।
विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर के पार
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश की बाहरी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों से निपटने की क्षमता का महत्वपूर्ण संकेतक होता है।
पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार होने से देश को अंतरराष्ट्रीय भुगतान संबंधी जरूरतों और बाहरी आर्थिक दबावों का सामना करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसकी स्थिति समय के साथ बदलती रहती है और इसका मूल्यांकन दूसरे आर्थिक संकेतकों के साथ किया जाता है।
मोदी ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली को भी कई दशकों में अपनी सबसे मजबूत स्थितियों में से एक बताया। उनके अनुसार, सरकार की सुधार प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के प्रयास जारी हैं।
भारत में 2.5 लाख से अधिक स्टार्टअप्स
भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्तार भी प्रधानमंत्री के संबोधन का प्रमुख हिस्सा रहा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से देश में नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा स्टार्टअप्स की संख्या 2.5 लाख से अधिक हो गई है।
स्टार्टअप कंपनियां तकनीक, स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्तीय सेवाओं, कृषि और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में नए समाधान विकसित कर रही हैं। इनके जरिए युवाओं को कारोबार शुरू करने और नई तकनीकों पर काम करने के अवसर मिलते हैं।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि लगभग आधे स्टार्टअप छोटे शहरों और कस्बों से आते हैं। इससे पता चलता है कि उद्यमिता का विस्तार बड़े महानगरों से आगे बढ़कर दूसरे क्षेत्रों तक पहुंच रहा है।
यदि छोटे शहरों में वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन, डिजिटल कनेक्टिविटी और बाजार तक पहुंच बेहतर होती है, तो स्थानीय स्तर पर नए कारोबार विकसित होने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी
प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत में 45 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या भागीदार है। यह आंकड़ा उद्यमिता के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी के महत्व को रेखांकित करता है।
महिलाओं की कारोबारी गतिविधियों में भागीदारी बढ़ने से रोजगार के अवसरों, नए व्यावसायिक विचारों और आर्थिक समावेशन को प्रोत्साहन मिल सकता है। इसके लिए महिलाओं को वित्तीय संसाधनों, व्यावसायिक नेटवर्क, तकनीकी प्रशिक्षण और बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।
स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को आगे बढ़ाने से देश के उद्यमिता तंत्र को अधिक विविध और व्यापक बनाने में मदद मिल सकती है।
भारत में 2,000 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत में 2,000 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र काम कर रहे हैं। ये केंद्र दुनिया की विभिन्न कंपनियों को तकनीकी, प्रबंधन, शोध और अन्य व्यावसायिक सेवाएं उपलब्ध कराते हैं।
वैश्विक क्षमता केंद्रों के विस्तार से भारत की कुशल प्रतिभा, तकनीकी विशेषज्ञता और सेवा क्षेत्र की क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है। इससे उच्च कौशल वाले रोजगार और ज्ञान आधारित गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
भारत के लिए इस क्षेत्र में अवसर बढ़ाने के साथ-साथ कर्मचारियों के कौशल विकास और आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षण पर ध्यान देना जरूरी होगा।
गरीबी में कमी और समावेशी विकास पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले दशक में भारत ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता हासिल की है। उन्होंने भारत की विकास यात्रा को सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ने की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया।
समावेशी विकास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों तक भी पहुंचे। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रधानमंत्री ने भारत की भाषाई और मीडिया विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में 100 से अधिक भाषाएं, लगभग 80 हजार पंजीकृत समाचार पत्र और पत्रिकाएं तथा 1,000 से अधिक सैटेलाइट टेलीविजन चैनल हैं। उन्होंने इन विशेषताओं को भारत की विविधता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की व्यापकता से जोड़ा।
वैश्विक विकास में भारत की बढ़ती भूमिका
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब दुनिया को किसी मजबूत सहयोगी की आवश्यकता होती है, तो भारत अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सहायता के लिए आगे आता है। उनके अनुसार, भारत की तकनीकी क्षमता, आर्थिक विकास और वैश्विक सेवाओं का विस्तार अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर तैयार कर सकता है।
कुल मिलाकर, ‘पावर टू एम्पॉवर’ का विचार भारत की विकास रणनीति में नागरिकों को सशक्त बनाने, डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देने और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने पर केंद्रित है। मजबूत आर्थिक विकास, विदेशी मुद्रा भंडार, स्टार्टअप्स का विस्तार और वैश्विक क्षमता केंद्रों की मौजूदगी भारत की आर्थिक संभावनाओं को रेखांकित करती है। आने वाले वर्षों में इन उपलब्धियों का व्यापक लाभ रोजगार, कौशल विकास और नागरिकों की जीवन गुणवत्ता में सुधार के रूप में सामने लाना महत्वपूर्ण होगा।
