दशहरा 2026 पर पीएम मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दी शुभकामनाएं, विजयादशमी पर दिया खास संदेश

देशभर में मंगलवार को विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक यह त्योहार भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखता है। इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को दशहरा की शुभकामनाएं देते हुए कामना की कि यह पर्व सभी के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करे और हर किसी का जीवन सुख, सौभाग्य तथा सफलता से समृद्ध हो। वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी विजयादशमी की पूर्व संध्या पर देश और विदेश में रहने वाले भारतीयों को बधाई दी। उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों, नैतिक आचरण और न्याय के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
पीएम मोदी ने देशवासियों को दी विजयादशमी की बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दशहरा के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए इस पर्व को उल्लास और विश्वास से जुड़ा त्योहार बताया। उन्होंने अपने संदेश में कामना की कि विजयादशमी हर व्यक्ति के संकल्प को मजबूत करे और जीवन में आगे बढ़ने की नई प्रेरणा दे।
प्रधानमंत्री का संदेश इस पर्व की सकारात्मक भावना को सामने लाता है। दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, साहस और सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देने वाला अवसर भी माना जाता है। इस दिन लोग अपने जीवन में अच्छे कार्यों को अपनाने और बुराइयों से दूर रहने का संकल्प लेते हैं।
पीएम मोदी ने सभी के जीवन में सुख, सौभाग्य और सफलता की कामना की। त्योहारों के अवसर पर दिए जाने वाले ऐसे संदेश समाज में सकारात्मकता, आपसी सद्भाव और सामूहिक उत्साह को बढ़ाने का काम करते हैं। विजयादशमी के मौके पर देशभर में धार्मिक कार्यक्रमों, पूजा-अर्चना और रावण दहन के आयोजन के बीच प्रधानमंत्री की शुभकामनाएं भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी दीं शुभकामनाएं
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विजयादशमी की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी थीं। अपने संदेश में उन्होंने देश और विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को इस पावन पर्व की बधाई दी और इसके सांस्कृतिक तथा नैतिक महत्व पर प्रकाश डाला।
राष्ट्रपति ने भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का उल्लेख करते हुए कहा कि यह त्योहार अधर्म और अन्याय पर धर्म तथा न्याय की जीत का प्रतीक है। भगवान श्रीराम को भारतीय परंपरा में धर्म, मर्यादा और नैतिक आचरण का आदर्श माना जाता है। उनके जीवन से जुड़े प्रसंग लोगों को कठिन परिस्थितियों में भी कर्तव्य और सत्य के मार्ग पर बने रहने की प्रेरणा देते हैं।
राष्ट्रपति का संदेश इस बात पर जोर देता है कि त्योहारों का महत्व केवल उत्सव मनाने तक सीमित नहीं है। ऐसे अवसर लोगों को अपने आचरण पर विचार करने, अच्छे मूल्यों को अपनाने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
भगवान श्रीराम की विजय से जुड़ा है दशहरा का महत्व
विजयादशमी को दशहरा के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू परंपरा के अनुसार, यह पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है। रामायण की कथा में श्रीराम को धर्म, मर्यादा और कर्तव्य का प्रतीक माना गया है, जबकि रावण का प्रसंग अहंकार और अधर्म के परिणामों की याद दिलाता है।
दशहरा का संदेश यही है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य और न्याय के रास्ते पर चलने का महत्व बना रहता है। यह पर्व लोगों को अपने भीतर मौजूद नकारात्मक आदतों, अहंकार और गलत व्यवहार को दूर करने की प्रेरणा भी देता है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में विजयादशमी को विभिन्न परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कई स्थानों पर रामलीला के आयोजन के बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। इन आयोजनों के माध्यम से भगवान श्रीराम की विजय की कथा को लोगों तक पहुंचाया जाता है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में इन कार्यक्रमों में शामिल होते हैं।
धर्म और न्याय की जीत का देता है संदेश
विजयादशमी का मूल संदेश बुराई पर अच्छाई की जीत है। यह त्योहार याद दिलाता है कि समाज में न्याय, ईमानदारी और नैतिकता जैसे मूल्यों का पालन करना जरूरी है। केवल दूसरों की गलतियों की ओर ध्यान देना पर्याप्त नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यवहार और जिम्मेदारियों पर भी विचार करना चाहिए।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संदेश में भारतीय संस्कृति को नैतिकता और कर्तव्य के आदर्शों से जुड़ा बताया। भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने देशवासियों से अपनी सांस्कृतिक विरासत के उच्च आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।
आज के समय में यह संदेश सामाजिक जीवन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। परिवार, कार्यस्थल और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, जिम्मेदारी तथा दूसरों के प्रति सम्मान बनाए रखना मजबूत समाज की बुनियाद है। विजयादशमी का पर्व इन मूल्यों को याद करने और उन्हें व्यवहार में उतारने का अवसर देता है।
विकसित भारत और समावेशी समाज बनाने का आह्वान
राष्ट्रपति ने देशवासियों से यह संकल्प लेने की अपील की कि वे भारतीय विरासत के आदर्शों पर चलते हुए विकसित भारत और समावेशी समाज के निर्माण में योगदान देंगे। इस संदेश में देश की प्रगति के साथ-साथ सामाजिक एकता और सभी लोगों के लिए समान अवसरों की भावना को भी महत्व दिया गया है।
विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय, जिम्मेदार नागरिकता और आपसी सहयोग जैसे पहलू भी अहम हैं। जब नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं और समाज के दूसरे लोगों के अधिकारों का सम्मान करते हैं, तब विकास का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंच सकता है।
विजयादशमी जैसे पर्व लोगों को एकजुट होने और साझा मूल्यों को मजबूत करने का अवसर देते हैं। विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं और परंपराओं के लोग इस त्योहार को अलग-अलग तरीकों से मनाते हैं, लेकिन बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश सभी को जोड़ता है।
देशभर में उत्साह के साथ मनाया जा रहा दशहरा
दशहरा के अवसर पर देशभर में धार्मिक आस्था और उत्सव का माहौल देखने को मिलता है। मंदिरों में पूजा-अर्चना, रामलीला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और रावण दहन जैसे आयोजन इस पर्व का प्रमुख हिस्सा हैं। कई जगहों पर मेले भी लगाए जाते हैं, जहां परिवार और बच्चे उत्सव का आनंद लेते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संदेशों में भी विजयादशमी की इसी सकारात्मक भावना को प्रमुखता दी गई है। प्रधानमंत्री ने लोगों के जीवन में सुख, सौभाग्य और सफलता की कामना की, जबकि राष्ट्रपति ने धर्म, न्याय, नैतिकता और कर्तव्य के आदर्शों पर चलने का संदेश दिया।
कुल मिलाकर, दशहरा केवल एक पारंपरिक त्योहार नहीं, बल्कि अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देने वाला अवसर है। विजयादशमी का संदेश यही है कि सत्य, सदाचार और न्याय के रास्ते पर चलते हुए हर व्यक्ति बेहतर समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकता है।
