भारत अब तकनीक अपनाने वाला नहीं, दुनिया को नई तकनीक देने वाला देश बनेगा: पीएम मोदी

भारत अब दूसरे देशों की तकनीकों को अपनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य की तकनीकों को विकसित करने और दुनिया को नए समाधान देने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव में भारत की वैज्ञानिक प्रगति और तकनीकी क्षमता को लेकर यह दृष्टिकोण सामने रखा। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं का बढ़ता कौशल, नवाचार के प्रति उनकी रुचि और आत्मविश्वास देश के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद जगाते हैं।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां देश का उद्देश्य केवल नई खोजों का लाभ उठाना नहीं, बल्कि खुद नई तकनीकों का निर्माण करना और वैश्विक चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करना है। यह बदलाव विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
तकनीक अपनाने से तकनीकी नेतृत्व तक भारत का सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पहले भारत में नई तकनीकों के पहुंचने में काफी समय लगता था। दुनिया के विकसित देशों में किसी तकनीक का विकास होने के बाद भारत उसे अपनाने, उसके अनुरूप बदलाव करने या अपनी जरूरतों के हिसाब से इस्तेमाल करने की कोशिश करता था। उस समय देश का मुख्य उद्देश्य तकनीकी अंतर को कम करना था।
हालांकि, अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान, डिजिटल सेवाओं और आधुनिक तकनीकों के विकास को लेकर नई संभावनाएं पैदा हुई हैं। देश के युवा नए विचारों के साथ आगे आ रहे हैं और कई क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने इस बदलाव को भारत की बदलती सोच का संकेत बताया। उनके अनुसार, अब देश को ऐसी तकनीकें विकसित करनी होंगी, जो भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के साथ दुनिया के सामने मौजूद समस्याओं का समाधान भी कर सकें।
अंतरिक्ष मिशनों ने बढ़ाया भारत का आत्मविश्वास
भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की प्रगति को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने मंगल मिशन और चंद्रयान अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने सीमित संसाधनों के बावजूद अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
भारत अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा तक पहुंचने में सफल रहा। इसके बाद चंद्रयान-3 मिशन के जरिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर देश ने इतिहास रचा। इन उपलब्धियों ने भारतीय वैज्ञानिकों की क्षमता और जटिल तकनीकी चुनौतियों से निपटने के सामर्थ्य को प्रदर्शित किया।
अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती उपलब्धियां भारत के लिए नए अवसर भी खोलती हैं। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान, उपग्रह तकनीक, संचार सेवाओं और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को प्रोत्साहन मिलता है।
कोरोना महामारी में वैक्सीन निर्माण बना मिसाल
प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी के दौरान भारत की भूमिका को भी देश की वैज्ञानिक क्षमता का उदाहरण बताया। महामारी के समय दुनिया के कई देशों के सामने वैक्सीन की उपलब्धता और बड़े पैमाने पर टीकाकरण जैसी चुनौतियां थीं। ऐसे समय में भारत ने स्वदेशी वैक्सीन विकसित करने और व्यापक टीकाकरण अभियान चलाने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया।
भारत ने घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ दूसरे देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई। इस अनुभव ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुसंधान, उत्पादन क्षमता और वैज्ञानिक संस्थानों के महत्व को उजागर किया।
प्रधानमंत्री के संदेश का प्रमुख उद्देश्य यह था कि भारत भविष्य में भी स्वास्थ्य, ऊर्जा और तकनीक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को मजबूत करे, ताकि किसी बड़े वैश्विक संकट के समय देश आत्मनिर्भर तरीके से प्रभावी कदम उठा सके।
वैज्ञानिक विरासत को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर
प्रधानमंत्री ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि देश की सभ्यता में विज्ञान, गणित, खगोल विज्ञान और खोज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। शून्य की अवधारणा और संख्या प्रणाली के विकास से लेकर आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान तक भारत की ज्ञान यात्रा लंबी रही है।
उन्होंने कहा कि इस विरासत को केवल अतीत की उपलब्धियों के रूप में देखने के बजाय आधुनिक अनुसंधान और नवाचार के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है। नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और शोधकर्ताओं को ऐसे अवसर मिलने चाहिए, जिनसे वे नए विचारों को वास्तविक तकनीकी समाधानों में बदल सकें।
विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा होगी महत्वपूर्ण
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री ने परमाणु ऊर्जा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए आने वाले समय में बड़ी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होगी। उद्योगों, आधुनिक परिवहन, डिजिटल सेवाओं और तकनीकी ढांचे के विस्तार के साथ बिजली की मांग भी बढ़ सकती है।
ऐसे में परमाणु ऊर्जा भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। देश स्वदेशी तकनीकों के विकास और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक को इस दिशा में अहम बताया। उन्होंने कहा कि देश के 500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने कुछ महीने पहले पहली बार क्रिटिकलिटी हासिल की। यह उपलब्धि भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता के प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
एआई और सेमीकंडक्टर में तकनीकी क्षमता बढ़ाने की तैयारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भारत को लगातार अपनी तकनीकी क्षमताएं बढ़ानी होंगी। इन क्षेत्रों की जरूरतें अलग-अलग हैं, लेकिन सभी में अनुसंधान, कुशल मानव संसाधन और आधुनिक तकनीकी ढांचे की महत्वपूर्ण भूमिका है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कृषि और उद्योगों में नए अवसर पैदा कर सकता है। वहीं, सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, संचार प्रणालियों और डिजिटल अर्थव्यवस्था की बुनियाद हैं। इन क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।
भारत के डिजिटल समाधान दुनिया के लिए बन सकते हैं उपयोगी
प्रधानमंत्री ने भारत के डिजिटल स्टैक और 5जी तकनीक का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में विकसित सफल तकनीकी समाधान दूसरे देशों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकते हैं। भारत ने डिजिटल सेवाओं के विस्तार के जरिए बड़े पैमाने पर लोगों तक तकनीक पहुंचाने का अनुभव हासिल किया है।
यह अनुभव उन देशों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है, जो अपनी डिजिटल सेवाओं, सार्वजनिक सुविधाओं और संचार व्यवस्था को बेहतर बनाना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट है कि भारत को भविष्य की तकनीकों में केवल भागीदारी करने के बजाय उनके विकास और नवाचार में अग्रणी बनना होगा। वैज्ञानिक अनुसंधान, युवा प्रतिभा, स्वदेशी तकनीक और वैश्विक सहयोग के मेल से भारत न केवल अपनी जरूरतों को पूरा कर सकता है, बल्कि दुनिया की समस्याओं के समाधान देने वाला प्रमुख तकनीकी केंद्र भी बन सकता है।
